ईरान-इजराइल युद्ध के बीच भारत की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पूरा मिडिल ईस्ट तनाव की आग में झुलसता नजर आ रहा है। दुनिया भर के कई देशों की ओर से प्रतिक्रियाएं आई हैं, लेकिन अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कोई आधिकारिक शोक संदेश जारी नहीं किया गया है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और इजराइल के नेतृत्व से बात की, लेकिन ईरान को लेकर एक शब्द भी नहीं कहा। उनका आरोप है कि इससे ऐसा प्रतीत होता है कि भारत सरकार ने इस संवेदनशील मामले में एक पक्ष चुन लिया है।
शिवसेना (यूबीटी) सांसद ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यदि ईरान के साथ भारत के ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध मजबूत हैं, तो खामेनेई के निधन पर संवेदना व्यक्त क्यों नहीं की गई? उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार अब तक ‘डिप्लोमैटिक चुप्पी’ क्यों साधे हुए है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत में बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोग रहते हैं और तेहरान के साथ संतुलित संबंध बनाए रखना आवश्यक है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति से फोन पर बातचीत कर मौजूदा हालात पर चर्चा की और कहा कि भारत इस कठिन समय में यूएई के साथ एकजुटता से खड़ा है।
पीएम मोदी ने नेतन्याहू से की बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत कर क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान पीएम मोदी ने हालिया घटनाक्रम को लेकर भारत की गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं और कहा कि किसी भी हाल में आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए संयम बरतने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। हालांकि ईरान को लेकर आधिकारिक बयान का इंतजार जारी है।