अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीद को लेकर लगाए गए टैरिफ और अन्य व्यापारिक मतभेदों के कारण लंबे समय से अटकी भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर बड़ी खबर सामने आई है।
कई महीनों की अनिश्चितता और बढ़ते व्यापारिक दबाव के बाद भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित व्यापार समझौता आखिरकार तय हो गया है। इस समझौते की घोषणा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर हुई बातचीत के बाद की।
अब इस पूरे प्रकरण पर राज्यसभा सांसद और शिवसेना उद्धव गुट की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने मोदी सरकार पर जोरदार तंज करते हुए सवाल उठाया है। इतना ही नहीं प्रियंका चतुर्वेदी ने इस पूरी डील को लेकर बड़ा दावा करते हुए उन्होंने डील पर सवाल उठाए हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी के अनुसार यह डील इंडिया के हित में नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि क्या यह डील जनता के फेवर में है या नहीं यह हम देश की जनता के ऊपर तय करते हैं। भारत वेनेजुएला का तेल खरीदने पर सहमत हुआ है और रूसी तेल और ईरान से तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हुआ है इससे किसका नुकसान होगा।
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद प्रियंका ने अमेरिकी राष्ट्रपति (POTUS) की हालिया सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देते हुए इस समझौते पर सवाल खड़े किए हैं और इसे भारत के हितों के खिलाफ बताया है।
प्रियंका ने लिखा कि POTUS की पोस्ट से जो तस्वीर उभरती है, उसके मुताबिक भारत पर लगने वाला रेसिप्रोकल टैरिफ 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया गया है। इसके बदले भारत अमेरिका के खिलाफ अपने टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर को शून्य तक लाने पर सहमत होता दिख रहा है। साथ ही, भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद रोकने पर भी सहमति बनने के संकेत मिलते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि पोस्ट में भले ही इसका सीधे तौर पर ज़िक्र नहीं है, लेकिन बजट के दिन किए गए पहले के दावों के अनुसार ईरान के कच्चे तेल को लेकर भी भारत इसी तरह का रुख अपना सकता है। इसके उलट, भारत के वेनेजुएला से तेल आयात पर सहमति की बात सामने आ रही है, जबकि भारत के कुल कच्चे तेल आयात में वेनेजुएला की हिस्सेदारी पहले से ही करीब 10 प्रतिशत बताई जाती है।
अमेरिकी मांगें मानने का आरोप
प्रियंका ने एक अन्य पोस्ट में लिखा कि इस समझौते के तहत अमेरिकी एलपीजी आयात को लेकर भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों से जुड़े समझौते, और SHANTI बिल 2025 को पास करना—जिससे न्यूक्लियर पावर सेक्टर में निजी कंपनियों की एंट्री संभव होगी—अमेरिका की मांगों को पूरा करने की दिशा में उठाए गए कदम माने जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि इस ट्रेड डील के तहत भारत अमेरिका से ऊर्जा, कृषि, कोयला और अन्य उत्पादों की करीब 500 अरब डॉलर की खरीद कर सकता है। वहीं, 2024 में अमेरिका को भारत का वस्तु निर्यात लगभग 41.5 अरब डॉलर और सेवाओं का निर्यात करीब 41.8 अरब डॉलर रहा था।
‘जश्न दबा-दबा क्यों?’
प्रियंका ने कहा कि शायद यही वजह है कि भारत में इस समझौते को लेकर उत्साह तो दिखता है, लेकिन जश्न दबा-दबा और जानकारी सीमित नजर आ रही है। उन्होंने तीखे शब्दों में लिखा कि जो लोग इसे भारत के लिए बेहद फायदेमंद सौदा मान रहे हैं, वे “बहुत भोले” हैं।
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