प्रयागराज में एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है, जिसने धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। एडीजे (रेप एंड पॉक्सो स्पेशल कोर्ट) ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानन्द गिरी के खिलाफ नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। मामला पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज होगा और झूंसी थाने की पुलिस को जांच सौंपी गई है।
यह आदेश एडीजे विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रहमचारी की अर्जी पर सुनवाई के बाद दिया। अर्जी में आरोप लगाया गया था कि आश्रम या शिविर की आड़ में नाबालिग बच्चों का यौन शोषण किया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि दो नाबालिगों ने उनसे संपर्क कर आपबीती बताई। 13 फरवरी को कोर्ट ने दोनों के वीडियो-ग्राफ्ड बयान दर्ज किए, जिन्हें आदेश का आधार माना गया।
बताया जा रहा है कि जनवरी 2026 में माघ मेले के दौरान यह मामला पहली बार उठा। पहले पुलिस कमिश्नर को शिकायत दी गई, लेकिन कार्रवाई न होने पर 8 फरवरी को विशेष पॉक्सो कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई। कोर्ट ने आरोपों को गंभीर मानते हुए तत्काल मुकदमा दर्ज कर विवेचना पूरी करने और रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।
बता दें कि हाल के महीनों में सरकार और शंकराचार्य के बीच मतभेद खुल के सामने आये थे। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कई मुद्दों पर सरकार के खिलाफ खुलकर बयान दे चुके हैं। ऐसे में एफआईआर के आदेश के बाद चर्चाएं तेज हो गई हैं—समर्थक इसे “आवाज उठाने की सजा” बता रहे हैं, जबकि विरोधी पक्ष कह रहा है कि कानून अपना काम कर रहा है।
फिलहाल स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब सबकी नजर पुलिस जांच पर टिकी है, जो तय करेगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।