सियासी

तेजस्वी को चक्रव्यूह में उलझाने के लिए राघोपुर से चुनाव लड़ेंगे पीके? इस सीट से राबड़ी देवी को भी करना पड़ा था हार का सामना.

बिहार के आगामी विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर के चुनावी मैदान में उतरने को लेकर लगाई जा रहीं अटकलों के बीच उनका बड़ा बयान सामने आया है. पीके ने बड़ा ऐलान करते ह्ए कहा है कि उनकी पार्टी बिहार की सभी 243 सीटों पर उम्मीदवार उतारने जा रही है.

वे खुद किस सीट से चुनाव लड़ने जा रहे हैं, इसको लेकर भी अपने इंटरव्यू में उन्होंने बड़ा संकेत दिया है. प्रशांत किशोर ने चुनाव लड़ने पर कहा है कि ‘इसका फैसला उनकी पार्टी करेगी, क्योंकि वे खुद को पार्टी से ऊपर नहीं मानते. अगर नीतीश कुमार चुनाव लड़ते हैं तो वे भी चुनाव में उतरेंगे और अगर पार्टी उन्हें तेजस्वी यादव के खिलाफ उतारती है तो इसके लिए भी वे तैयार हैं’.
अपने चुनावी क्षेत्र को लेकर पीके ने संकेत देते हुए कहा कि ‘अगर वे चुनाव लड़ेंगे तो अपनी जन्मभूमि या कर्मभूमि से लड़ना चाहेंगे. जन्मभूमि के हिसाब से सासाराम या करगहर उनके लिए उपयुक्त सीट हो सकती है, जबकि कर्मभूमि के लिहाज से राघोपुर सही जगह मानी जाएगी’.

राघोपुर सीट के क्या हैं सियासी मायने ?

दरअसल राघोपुर विधानसभा सीट तेजस्वी यादव और उनकी पार्टी आरजेडी के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. यह सीट लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी का पारंपरिक गढ़ रही है.
तेजस्वी यादव ने अपनी राजनीतिक शुरुआत 2015 में यहीं से की थी और जीत दर्ज कर उपमुख्यमंत्री बने थे. 2020 में उन्होंने दोबारा इसी सीट से जीत हासिल की. यही वजह है कि राघोपुर न सिर्फ तेजस्वी की पहचान से जुड़ा है, बल्कि आरजेडी की साख भी है. हालांकि 2010 के चुनाव में रबड़ी देवी को भी हार का समाना करना पड़ा था.

अगर 2020 के विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो यहां से तेजस्वी यादव को करीब 48 फीसदी वोट मिले तो वहीं दूसरे स्थान पर रहे बीजेपी के उम्मीदवार सतीश कुमार यादव को लगभग 29 फीदसी वोट मिला था. 1967 के बाद से इस सीट पर कोई भी गैर यादव उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाया है.

राघोपुर का जातीय समीकरण

राघोपुर में लगभग 30 फीसदी यादव मतदाता हैं. करीब 20 फीसदी राजपूत और 18 फीसदी दलित मतदाता हैं. इसके बाद ब्राह्मण, भूमिहार और बनिया वोटों की संख्या भी ठीक ठाक है. ऐसे में पीके की कोशिश होगी कि सवर्ण मतदाताओं के दम पर वो तेजस्वी को टक्कर दें. हालांकि ये फिलहाल की स्थिति को देखते हुए टेढ़ी खीर जैसी लग रही है. अगर पीके इस सीट पर चुनाव लड़ते हैं तो, 2025 के चुनाव में यह तेजस्वी यादव के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई होगी.

क्या सीएम कुर्सी पर पीके करेंगे दावेदारी ?

पीके के बयान को देखा जाए तो वो सीधे या तो नीतीश कुमार के खिलाफ दावेदारी की बात कर रहे हैं या फिर तेजस्वी यादव के खिलाफ. नीतीश वर्तमान सीएम हैं और महागठबंधन की तरफ से ऐलान भले ही ना हुआ हो लेकिन तेजस्वी ही सीएम कैंडिडेट के तौर पर देखे जा रहे हैं. ऐसे में क्या पीके अपना कद बिहार की राजनीति में इन दोनों नेताओं के बराबर मान रहे हैं. फिलहाल पीके की जन सुराज पार्टी अभी तक किसी गठबंधन में नहीं है.

news desk

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