बांदा/चित्रकूट: उत्तर प्रदेश के बांदा की पॉक्सो अदालत ने एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। कोर्ट ने जूनियर इंजीनियर (JE) रामभवन कुशवाहा और उसकी पत्नी दुर्गावती को 34 मासूम बच्चों के यौन शोषण और उनके अश्लील वीडियो डार्क वेब पर बेचने के जुर्म में ‘सजा-ए-मौत’ सुनाई है। बांदा कोर्ट के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी महिला को फांसी की सजा दी गई है।
सरकारी क्वार्टर में चलता था ‘हैवानियत’ का खेल
यह मामला साल 2020 में तब सामने आया जब चित्रकूट जैसे शांत और धार्मिक शहर के एक सरकारी क्वार्टर की हकीकत दुनिया के सामने आई। सिंचाई विभाग में तैनात पढ़ा-लिखा जेई रामभवन कुशवाहा, जिसका काम बांधों की देखरेख करना था, वह असल में डार्क वेब का एक खूंखार शिकारी निकला। इस घिनौनी साजिश में उसकी पत्नी दुर्गावती बराबर की भागीदार थी।
ये दोनों गरीब घरों के 5 से 16 साल के मासूम बच्चों को खिलौनों और चॉकलेट का लालच देकर घर बुलाते थे। वहां बच्चों के साथ दुष्कर्म किया जाता और लैपटॉप के वेबकैम से उसकी रिकॉर्डिंग की जाती। जांच में खुलासा हुआ कि यह जोड़ा बांदा, चित्रकूट और हमीरपुर के करीब 3 साल तक के छोटे बच्चों को भी अपना शिकार बनाता था।
47 देशों में फैला था नेटवर्क, इंटरपोल ने दी सूचना
इन मासूमों के बचपन का सौदा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहा था। रामभवन इन वीडियो को डार्क वेब के जरिए अमेरिका, चीन, ब्राजील और अफगानिस्तान समेत 47 देशों में ऊंचे दामों पर बेचता था। इस अंतरराष्ट्रीय पेडोफाइल नेटवर्क की भनक जब इंटरपोल (Interpol) को लगी, तो उन्होंने भारत की CBI को अलर्ट भेजा।
31 अक्टूबर 2020 को सीबीआई ने केस दर्ज किया और नवंबर में बांदा के नरैनी कस्बे में छापेमारी कर इस दंपति को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी में 8 लाख रुपये नकद, मोबाइल, दर्जनों पेनड्राइव और हार्ड डिस्क बरामद हुए, जिनमें 679 अश्लील फोटो और सैकड़ों वीडियो मौजूद थे।

74 गवाह और ऐतिहासिक फैसला
सीबीआई ने महज 88 दिनों के भीतर 700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। मुकदमे के दौरान 74 गवाह पेश किए गए, जिनमें 24 पीड़ित बच्चे भी शामिल थे। इन मासूमों की गवाही ने अदालत में शैतान दंपति के गुनाहों की कलई खोल दी।
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) प्रदीप कुमार मिश्रा ने दोनों को दोषी करार देते हुए आदेश दिया कि “इन्हें तब तक फंदे पर लटकाया जाए जब तक इनकी जान न निकल जाए।” साथ ही कोर्ट ने जिला प्रशासन को प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश भी दिया है। यह फैसला उन दरिंदों के लिए एक कड़ा संदेश है जो तकनीक की आड़ में मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ करते हैं।