प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 साल पूरे होने पर एक खास डाक टिकट और सिक्का जारी किया. इस मौके पर उन्होंने संघ की तारीफ करते हुए कहा कि आरएसएस की सौ साल की यात्रा त्याग, सेवा, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण का बड़ा उदाहरण है. पीएम मोदी ने कहा कि हमारी पीढ़ी खुशकिस्मत है, जो संघ के शताब्दी वर्ष को देख रही है. उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस ने अपनी शुरुआत से ही देश और समाज के निर्माण पर ध्यान दिया है. कहा कि 1963 में आरएसएस के गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल हुए थे और पूरे गर्व के साथ राष्ट्रभक्ति की धुन पर कदमताल किया था. नरेंद्र मोदी का ये भी कहना है कि संघ के सेवक लगातार देश और समाज की सेवा में लगे हैं और लोगों को मजबूत बना रहे हैं.
कांग्रेस ने लगाये संगठन पर गंभीर आरोप
वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने ट्विटर पर एक पोस्ट करते हुए RSS पर तंज़ किया है. जिसमे लिखा की इतिहास के पन्नों में दर्ज है RSS का देशविरोधी चेहरा. कांग्रेस ने एक विडिओ भी पोस्ट करके कहा कि (RSS) को अक्सर आजादी की लड़ाई से दूरी और विभाजनकारी राजनीति के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है. इतिहास गवाह है कि 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में जब पूरा देश अंग्रेजों के खिलाफ जेल जा रहा था, तब RSS ने इसमें कोई भूमिका नहीं निभाई. इसके विपरीत, संगठन पर अंग्रेजों का सहयोग करने और स्वतंत्रता सेनानियों को “अराजक” कहने के आरोप लगे थे जिसमे एक नारा भी लगाया गया था
जो देशभक्त थे, वो जंग में गए जो गद्दार थे, वो संघ में गए.
“RSS की संविधान सभा में कोई भूमिका ” – कांग्रेस
कांग्रेस ने कहा कि महात्मा गांधी, भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों की कुर्बानियों के समय RSS के किसी भी नेता को कभी जेल नहीं जाना पड़ा और न ही ब्रिटिश शासन ने उस पर कोई प्रतिबंध लगाया. आलोचक कहते हैं कि RSS की सोच ने हिंदू-मुस्लिम विभाजन को हवा दी, जिसके परिणामस्वरूप देश का विभाजन और खूनखराबा हुआ. वहीं आगे लिखा की आजादी के बाद भी RSS ने संविधान की बजाय मनुस्मृति का समर्थन किया और संविधान सभा में उसकी कोई भूमिका नहीं रही. कांग्रेस ने कहा की 78 साल बाद भी RSS पर यह आरोप है कि यह समाज में सांप्रदायिक नफरत फैलाकर सत्ता पर काबिज रहने का प्रयास करता है. और लिखा कि देश की कई समस्याओं की जड़ RSS की विचारधारा है, और जब तक यह संगठन नफरत की राजनीति नहीं छोड़ेगा, तब तक देश में स्थायी शांति संभव नहीं है.