बाजार

दुनिया में सस्ता हुआ पेट्रोल-डीजल, लेकिन भारत में क्यों नहीं घटे दाम?

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम फिलहाल स्थिर बने हुए हैं। जहां कई देशों ने तेल कीमतों में कटौती कर राहत दे दी है, वहीं भारत में उपभोक्ताओं को अभी इंतजार करना पड़ सकता है। सवाल उठ रहा है कि जब पड़ोसी देशों में ईंधन सस्ता हो रहा है तो भारत में कीमतें क्यों नहीं घट रहीं।

हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर से नीचे आई हैं और ब्रेंट क्रूड करीब 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। इसके बावजूद घरेलू बाजार में ईंधन दरों में तत्काल राहत नहीं दिखाई दे रही।

पड़ोसी देशों में घटी कीमतें, भारत में रेट स्थिर

कई देशों में पेट्रोल और डीजल के दामों में कमी दर्ज की गई है। पाकिस्तान, भूटान, म्यांमार, नेपाल, चीन, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों में ईंधन कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। वहीं भारत में कीमतें लगभग पुराने स्तर पर बनी हुई हैं।

राजधानी दिल्ली में पेट्रोल करीब 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल लगभग 95.20 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर बना हुआ है।

भारत में तुरंत क्यों नहीं घटते पेट्रोल-डीजल के दाम?

जानकारों के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह वह अवधि है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने के बावजूद घरेलू स्तर पर तेल कंपनियों ने लंबे समय तक कीमतें नहीं बढ़ाईं। इस दौरान कंपनियों पर बड़ा वित्तीय दबाव पड़ा।

माना जा रहा है कि तेल कंपनियों को उस समय हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए मौजूदा स्थिर कीमतों को कुछ समय तक बनाए रखना पड़ सकता है।

सरकार की टैक्स नीति भी बड़ी वजह

विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी अवधि में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार ने उत्पाद शुल्क में भी कटौती की थी। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिली, लेकिन सरकारी राजस्व पर असर पड़ा।

ऐसे में केवल कच्चा तेल सस्ता होने से पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत कम हो जाएं, यह जरूरी नहीं माना जा रहा। कीमतों पर टैक्स, परिवहन लागत, रिफाइनिंग खर्च और तेल कंपनियों की लागत वसूली भी असर डालती है।

क्या आने वाले महीनों में मिल सकती है राहत?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं, तो अगले कुछ महीनों में तेल कंपनियों को राहत मिल सकती है। इसके बाद पेट्रोल और डीजल के दामों पर फैसला लिया जा सकता है। फिलहाल बाजार की नजर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और सरकारी नीति पर बनी हुई है।

vineet verma

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