ओवैसी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उनके बयान अक्सर मीडिया की हेडलाइन बन जाते हैं। इस बार उन्होंने बीजेपी नेता नवनीत राणा पर जोरदार हमला बोला है।
दरअसल, ओवैसी ने नवनीत राणा के चार बच्चे पैदा करने वाले बयान पर पलटवार किया और तंज कसते हुए कहा, “मैंने खुद छह बच्चे पैदा किए हैं, आपको कौन रोक रहा?”
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा नेता नवनीत राणा के चार बच्चे पैदा करने वाले बयान पर तीखा पलटवार किया है। ओवैसी ने तंज कसते हुए कहा, “आपको कौन रोक रहा है? मैंने खुद छह बच्चे पैदा किए हैं।”
उन्होंने इस मुद्दे को महाराष्ट्र से जोड़ते हुए कहा कि वहां पंचायत चुनाव लड़ने के लिए दो से अधिक बच्चे होने पर रोक का प्रावधान है, जबकि तेलंगाना में इस तरह के नियम में बदलाव किया जा चुका है।
ओवैसी ने आगे कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की मौजूदगी में चंद्रबाबू नायडू भी तीन से ज्यादा बच्चे पैदा करने की बात कर चुके हैं। इस पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, “करो ना भाई, कोई रोक रहा है क्या?” ओवैसी के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में जनसंख्या और नियमों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।
जनसंख्या को लेकर जारी बहस के बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भारत के टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) में आई गिरावट का जिक्र करते हुए अहम बातें कही हैं। ओवैसी ने कहा कि देश में प्रजनन दर लगातार घट रही है और मुसलमानों का TFR सबसे तेजी से कम हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही यह अभी हिंदुओं के बराबर न हुआ हो, लेकिन आने वाले समय में दोनों के आंकड़े लगभग समान हो जाएंगे।
ओवैसी ने यह भी कहा कि पहले यह धारणा बनाई जाती थी कि मुसलमानों की आबादी तेजी से बढ़ेगी और वे हिंदुओं की जनसंख्या को पीछे छोड़ देंगे, लेकिन मौजूदा आंकड़े इस दावे को गलत साबित करते हैं।
डेमोग्राफिक डिविडेंड पर चिंता जताते हुए ओवैसी ने विशेषज्ञों के हवाले से कहा कि हिंदुओं की जनसंख्या 2069–2070 के आसपास स्थिर हो जाएगी, जबकि मुसलमानों की जनसंख्या भी उसी अवधि में स्थिरता की ओर बढ़ेगी। उन्होंने आगाह किया कि अगले 30 से 40 वर्षों में देश की करीब 50 फीसदी आबादी वृद्धावस्था में पहुंच जाएगी।
ओवैसी ने सवाल उठाया कि इस चुनौती से निपटने के लिए देश किस तरह की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के पास अगले 20 से 22 वर्षों तक डेमोग्राफिक डिविडेंड का लाभ उठाने का अहम अवसर है, जिससे देश के सुपर पावर बनने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में इस अवसर का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है।
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