ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025
नई दिल्ली: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने ऑनलाइन मनी गेमिंग पर प्रतिबंध कानून को चुनौती देने वाली A23 कंपनी की याचिका पर सुनवाई रोक दी है. अदालत ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस याचिका पर जल्द सुनवाई करने का निर्णय लिया है, जिसमें ऑनलाइन गेमिंग एक्ट 2025 से जुड़ी सभी याचिकाओं को अलग-अलग हाईकोर्ट्स से सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की गई है. कोर्ट का मानना है कि अगर अलग-अलग अदालतों में सुनवाई होगी तो विरोधाभासी फैसले आ सकते हैं.
कंपनियों की दलील और बड़ा असर
केंद्र द्वारा लाया गया प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट 2025 रियल-मनी गेम्स पर पूरी तरह बैन लगाता है. इस कानून को लेकर कर्नाटक, दिल्ली और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अलग-अलग कंपनियों ने याचिकाएं दाखिल की हैं. इनमें क्लबबूम 11 स्पोर्ट्स, हेड डिजिटल वर्क्स (A23 रम्मी) और बघीरा कैरम शामिल हैं. कंपनियों का कहना है कि यह कानून हजारों लोगों की रोज़ी-रोटी छीन लेगा और स्किल-बेस्ड गेम्स जैसे रमी और पोकर को भी गैंबलिंग की श्रेणी में डालना गलत है.
A23 का दावा-व्यापार के मौलिक अधिकार का हनन
A23 की ओर से तर्क दिया गया है कि यह अधिनियम व्यापार के मौलिक अधिकार का हनन करता है और इससे गेमिंग इंडस्ट्री को भारी नुकसान होगा. कंपनियों का कहना है कि ऐसे कड़े प्रतिबंध से खिलाड़ी अवैध ऑफशोर प्लेटफॉर्म्स की ओर रुख कर सकते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को 8 सितंबर के लिए सूचीबद्ध किया है. आज की सुनवाई में यह तय होगा कि क्या सभी याचिकाएं एक साथ सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर होंगी. निवेशक और ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां इस फैसले को लेकर बड़ी उम्मीद लगाए बैठे हैं, क्योंकि यह सेक्टर के भविष्य की दिशा तय करेगा.
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