ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष को 11 दिन हो चुके हैं और दोनों देशों के बीच हमले लगातार जारी हैं। इस टकराव के चलते पूरे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस संघर्ष में United States की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है, जबकि जमीनी स्तर पर लड़ाई मुख्य रूप से Iran और Israel के बीच ही केंद्रित है।
मौजूदा हालात को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि अमेरिका अब किसी भी तरह इस युद्ध से बाहर निकलना चाहता है। माना जा रहा है कि अगर अमेरिका ने अपने कदम पीछे खींच लिए तो इजरायल के लिए हालात और मुश्किल हो सकते हैं।
अमेरिका लगातार सुलह का प्रस्ताव दे रहा है, लेकिन ईरान ने साफ कर दिया है कि युद्ध तभी खत्म होगा जब उसकी शर्तें मानी जाएंगी।
इसी बीच ईरान के लगातार जारी मिसाइल हमलों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इन हमलों के कारण डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है और माना जा रहा है कि वह किसी भी तरह इस संघर्ष से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे हैं।
ईरान की बढ़ती सैन्य कार्रवाई और तेज हमलों ने ट्रंप के उन दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें उन्होंने युद्ध में बढ़त का दावा किया था।ईरान का कहना है कि वह इस युद्ध को लंबा खींचने के लिए तैयार है और जरूरत पड़ने पर छह महीने तक लड़ सकता है। इसी बीच ईरान ने अपने हमले तेज करते हुए पूरे क्षेत्र में जहाजों, ऑयल रिफाइनरी और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
ईरानी हमले के बाद दो तेल टैंकरों में भीषण आग लग गई। इस हमले में टैंकर पर सवार एक क्रू सदस्य की मौत हो गई, जबकि 38 लोगों को इराक के सुरक्षाकर्मियों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। रिपोर्टों के मुताबिक ये जहाज अमेरिकी कंपनी STS से जुड़े हुए थे।
वहीं संयुक्त अरब अमीरात में भी ईरान ने एक जहाज को निशाना बनाया, जिसके बाद उसमें हल्की आग लग गई। दूसरी ओर बहरीन में हुए हमलों को लेकर वहां की सरकार ने कहा कि यह ईरान की खुली आक्रामकता है।
सरकार के मुताबिक हमले में मुहर्रक गवर्नरेट स्थित एक केंद्र के ईंधन टैंकों को निशाना बनाया गया, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है।
एक इराकी अधिकारी ने बताया कि ऑयल टैंकर पर हमले के बाद इराक के तेल बंदरगाहों पर संचालन पूरी तरह ठप हो गया है, जबकि कमर्शियल बंदरगाहों पर कामकाज जारी है।
इराक की कंपनी फॉर पोर्ट्स के प्रमुख फरहान अल-फरतौसी ने अल-इराकिया न्यूज को बताया कि हमले में एक क्रू सदस्य की मौत हो गई और 38 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। उन्होंने यह भी कहा कि लापता व्यक्तियों की तलाश अभी जारी है।
कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में यह भी दावा किया जा रहा है कि China और Russia इस पूरे घटनाक्रम में कूटनीतिक स्तर पर ईरान का समर्थन कर सकते हैं। हालांकि अभी तक इसको लेकर आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
इसी बीच Donald Trump को लेकर भी एक खबर चर्चा में है। बताया जा रहा है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप काफी चिंतित नजर आ रहे हैं। मीडिया में भले ही अमेरिका अपनी रणनीतिक बढ़त का दावा कर रहा हो, लेकिन ईरान की ओर से लगातार पलटवार ने हालात को जटिल बना दिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बातचीत निर्णायक मोड़ पर पहुंचने से पहले ही अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला किया था, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत की खबर भी सामने आई थी। इसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया।