Trending News

अब आपकी टी-शर्ट और जींस बनेगी ‘रोबोटिक असिस्टेंट’ ! क्या शुरू होने वाला है स्मार्ट कपड़ों का दौर ?

आने वाले समय में आपके पहने गए कपड़े न केवल आपकी स्टाइल बढ़ाएंगे, बल्कि चलने-फिरने और उठने-बैठने में आपकी मदद भी करेंगे। कनाडा सरकार के ‘न्यू फ्रंटियर्स इन रिसर्च फंड’ की तरफ से समर्थित एक बड़े अंतरराष्ट्रीय रिसर्च प्रोग्राम के तहत ऐसी ‘स्मार्ट क्लोदिंग’ तैयार की जा रही है, जो आम कपड़ों जैसी दिखेगी लेकिन अंदर से एक रोबोट की तरह काम करेगी।

इस छह साल के प्रोजेक्ट में कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ अल्बर्टा के साथ अमेरिका की राइस यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डैनियल जे. प्रेस्टन और वैनेसा सांचेज मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। इस पहल का मकसद ऐसे कपड़े बनाना है जो बुजुर्गों, मरीजों या शारीरिक रूप से कमजोर लोगों को चुपचाप सहायता दे सकें।

क्या है इस तकनीक की खासियत?

अभी तक बाजार में मौजूद रोबोटिक सूट काफी भारी, महंगे और दिखने में अजीब होते हैं। लेकिन यह नई तकनीक कपड़ों के धागों (फाइबर्स) में ही इंटेलिजेंस डाल देगी। ये स्मार्ट कपड़े कई तरह से मददगार होंगे:

उठने-बैठने में मदद: ये कपड़े कुर्सी से उठने या बैठने के दौरान मांसपेशियों को अतिरिक्त ताकत देंगे।

संतुलन और पोस्चर: चलने के दौरान शरीर का संतुलन बनाए रखने और झुककर काम करने वालों को सही पोस्चर देने में मदद करेंगे।

हल्के और धोने लायक: इन कपड़ों को आम कपड़ों की तरह धोया जा सकेगा और इन्हें पहनकर भारीपन महसूस नहीं होगा।

धागों में छिपी है तकनीक

इस रिसर्च में फाइबर साइंस और रोबोटिक्स का संगम है। वैज्ञानिक ऐसे धागे तैयार कर रहे हैं जो सेंसर के इशारे पर कड़े या लचीले हो सकते हैं। इनमें छोटे-छोटे सेंसर लगे होंगे जो इंसान की हरकत को भांप लेंगे। खास बात यह है कि इस तकनीक में डेटा की प्राइवेसी का भी ध्यान रखा गया है; जानकारी को प्रोसेस करने वाला पूरा सिस्टम कपड़े के अंदर ही फिट होगा, जिससे डेटा लीक होने का खतरा नहीं रहेगा।

प्रोजेक्ट के तीन बड़े लक्ष्य

वैज्ञानिकों ने इस प्रोजेक्ट को तीन मुख्य हिस्सों में बांटा है:

पोस्चर सपोर्ट: बुजुर्गों और देखभाल करने वालों के लिए पीठ और कंधे को सहारा देने वाले कपड़े।

स्मार्ट स्लीव्स: हाथों की मूवमेंट और रोजाना के कामों में मदद करने वाली आस्तीनें।

स्मार्ट लेगिंग्स: चलने-फिरने, लड़खड़ाने से बचाने और खड़े होने में मदद करने वाले पैंट या शॉर्ट्स।

आम लोगों की भागीदारी

लगभग 24 मिलियन कनाडाई डॉलर के इस बड़े प्रोजेक्ट में केवल वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि डॉक्टर, कलाकार और वे लोग भी शामिल हैं जो चलने-फिरने की समस्या से जूझ रहे हैं। उनकी सलाह के आधार पर ही इन कपड़ों का डिजाइन तैयार किया जा रहा है ताकि ये हर उम्र और हर शरीर के प्रकार के लिए आरामदायक हों।

अगले कुछ वर्षों में इस तकनीक के ट्रायल पूरे होने की उम्मीद है। यदि यह प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो भविष्य में विकलांगता या बढ़ती उम्र के कारण होने वाली शारीरिक समस्याओं का समाधान हमारे वॉर्डरोब में ही छिपा होगा।

IpressHouse

Recent Posts

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का छत्तीसगढ़ दौरा अचानक स्थगित, इंडिया गठबंधन के विरोध-प्रदर्शन के बीच टला कार्यक्रम

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का छत्तीसगढ़ दौरा अचानक स्थगित कर दिया गया है।…

44 minutes ago

IND vs WI: श्रेयस अय्यर ने 42 गेंद में ठोका शतक, विराट कोहली का रिकॉर्ड तोड़ बने पहले भारतीय कप्तान

लखनऊ । भारत और वेस्टइंडीज के बीच लखनऊ के इकाना क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए…

1 hour ago

IND vs WI 1st T20I: नमन धीर का ऐतिहासिक डेब्यू, स्पिन जादू से ध्वस्त हुआ वेस्टइंडीज; बनाया बड़ा रिकॉर्ड

लखनऊ। भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेले गए पहले टी20 मुकाबले में युवा ऑलराउंडर नमन…

2 hours ago

RBI Repo Rate Hike: रेपो रेट बढ़ा तो कितनी बढ़ेगी आपकी EMI? 10 से 50 लाख के होम लोन का पूरा हिसाब

नई दिल्ली। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) 7 अक्टूबर को सुबह 10 बजे…

2 hours ago

9 अक्टूबर से शनि की चाल बदलेगी, इन 5 राशियों के खुलेंगे कमाई के रास्ते; 122 दिनों तक धन-करियर में बनेंगे लाभ के योग

नई दिल्ली: वैदिक ज्योतिष में शनि को न्याय और कर्मफल का देवता माना जाता है।…

2 hours ago