क्या आपने कभी सोचा था कि आसमान में उड़ने वाले कबूतर भी इंसानी इशारों पर काम करेंगे? रूस की एक न्यूरो टेक्नोलॉजी कंपनी नाइरी (Neiry) ने AI और एडवांस सर्जरी की मदद से इस इमेजिनेशन को हकीकत बना दिया है| उन्होंने कबूतरों को सेंसर-फिटेड, रिमोट-कंट्रोल्ड ‘बायो-ड्रोन’ में बदल दिया है|
सक्सेसफुल टेस्टिंग ऑफ़ ‘बायो-ड्रोन’
ये कोई नार्मल एक्सपेरिमेंट नहीं है, ये बायो-हैकिंग का फ्यूचर है| कंपनी ने कबूतरों के ब्रेन में माइक्रो-इलेक्ट्रोड की मदद से एक न्यूरल चिप लगाई है। ये चिप एक Solar-Powered Control Unit से जुड़ी है, जो बर्ड्स की पीठ पर लगी होगी. यानी हवा में रहते हुए ये यूनिट रियल-टाइम में चार्ज होती रहेगी.
साइंटिस्ट्स एक क्लिक पर इन ‘जिंदा ड्रोन्स’ को रिमोट से डायरेक्ट कर सकते हैं.जिससे ये बर्ड्स अब ट्रेनर की ट्रेनिंग पर नहीं, बल्कि Digital Command पर उड़ेंगे.
क्यों ये ट्रेडिशनल ड्रोन से बेहतर हैं?
टेक कंपनी Neiry का दावा है कि ये AI-कंट्रोल्ड मिशन के लिए टॉप-टियर परफॉरमेंस देंगे:
• रेंज एंड एंड्योरेंस: जहाँ ट्रेडिशनल ड्रोन लिमिटेड बैटरी लाइफ के वजह से ज़्यादा दूर नहीं जा पाते, वहीं बायो-ड्रोन हाई एंड्योरेंस के चलते लंबी दूरी की उड़ान आसानी से कवर कर सकते हैं.
• अवेयरनेस: ट्रेडिशनल ड्रोन अपनी इनफार्मेशन के लिए सेंसर डेटा पर डिपेंड रहते हैं, जबकि बायो-ड्रोन बर्ड्स की इंटेलिजेंस और सेंसर डेटा दोनों का यूज करके ज़्यादा स्मार्ट अवेयरनेस रखने का काम करेंगे।
• एप्लीकेशन: जहाँ ट्रेडिशनल ड्रोन का यूज़ नॉर्मल मैपिंग जैसे बेसिक कामों के लिए होता है, वहीं बायो-ड्रोन को सीक्रेट निगरानी और मुश्किल इलाकों में रेस्क्यू जैसे चैलेंजिंग मिशन के लिए बनाया गया है.
Neiry की प्लानिंग है कि वो इस न्यूरो-लिंक टेक्नोलॉजी को जल्द ही कौवों, बत्तखों और दूसरे पक्षियों पर भी टेस्ट करेगी. हालांकि, ये टेक्नोलॉजी रोबोटिक्स, AI, और एनिमल एथिक्स के बीच एक बड़ी डिबेट शुरू कर सकती है.