लखनऊ/नोएडा, 16 अप्रैल 2026: नोएडा-ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक इलाकों में हालिया श्रमिक प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ संदेश दिया है कि मजदूरों के अधिकार, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा। सरकार ने तेज कार्रवाई करते हुए न्यूनतम मजदूरी में 21% तक अंतरिम बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू मानी जाएगी।
सीएम योगी ने कहा कि श्रमिकों के हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है, लेकिन इसके साथ औद्योगिक शांति भी जरूरी है। उन्होंने साफ किया कि अराजकता, हिंसा और बाहरी तत्वों की दखल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी बीच सरकार ने नियोक्ताओं और ठेकेदार एजेंसियों को भी सख्त चेतावनी दी है कि श्रम कानूनों का हर हाल में पालन सुनिश्चित करें।
नई सैलरी स्ट्रक्चर: नोएडा-गाजियाबाद के श्रमिकों को सबसे ज्यादा फायदा
सरकार के नए अंतरिम वेतन ढांचे के तहत गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) और गाजियाबाद के श्रमिकों को सबसे ज्यादा राहत मिली है। अब अकुशल श्रमिकों की मासिक मजदूरी ₹13,690, अर्धकुशल की ₹15,059 और कुशल श्रमिकों की ₹16,868 कर दी गई है। पहले ये क्रमशः ₹11,313, ₹12,445 और ₹13,940 थी। यानी कुछ श्रेणियों में करीब 21% तक बढ़ोतरी हुई है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अन्य नगर निगम क्षेत्रों में 9–15% तक बढ़ोतरी और बाकी जिलों में भी संशोधित दरें लागू की गई हैं। यह फैसला नोएडा के फैक्ट्री बेल्ट में कई दिनों से चल रहे प्रदर्शन के बाद लिया गया, जहां हजारों श्रमिक बेहतर वेतन और कामकाजी सुविधाओं की मांग कर रहे थे।
कंपनियों के लिए सख्त आदेश: बैंक में सैलरी, ओवरटाइम पर डबल पे
योगी सरकार ने कंपनियों और नियोक्ताओं के लिए कई सख्त प्रशासनिक निर्देश भी जारी किए हैं। अब सभी कंपनियों को हर महीने 10 तारीख तक मजदूरी सीधे बैंक अकाउंट में जमा करनी होगी। इसके साथ सैलरी स्लिप देना अनिवार्य, ओवरटाइम पर दोगुना भुगतान, साप्ताहिक अवकाश, बोनस और सामाजिक सुरक्षा लाभ समय पर देने के निर्देश दिए गए हैं।
महिला श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान को भी प्राथमिकता में रखा गया है। प्रशासन ने सभी औद्योगिक इकाइयों से कहा है कि वे शिकायत निवारण और श्रमिक संवाद तंत्र को मजबूत करें, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई और ब्लैकलिस्टिंग तक की चेतावनी दी गई है।
कुल मिलाकर, नोएडा प्रदर्शन के बाद योगी सरकार का यह कदम श्रमिकों के गुस्से को शांत करने, पारदर्शी वेतन व्यवस्था लाने और औद्योगिक शांति बहाल करने की दिशा में बड़ा फैसला माना जा रहा है। आगे स्थायी न्यूनतम वेतन तय करने के लिए वेज बोर्ड गठित करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।