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नया ज़माना, नया जाम: Gen Z ने ‘ज़ीब्रा स्ट्रिपिंग’ से बदली पीने की आदतें! भारत में 68 अरब डॉलर का नॉन-अल्कोहलिक धमाका!

युवा पीढ़ी, यानी जेनरेशन Z (Gen Z), केवल सोशल मीडिया के ट्रेंड्स को ही नहीं बदल रही, बल्कि अपने स्वस्थ जीवनशैली के जुनून से देश के अरबों डॉलर के शराब बाज़ार की दिशा भी तय कर रही है. देश में कुल शराब की खपत बढ़ रही है, लेकिन पार्टी करने के तरीक़ों में जो क्रांतिकारी बदलाव आया है, उसने शराब कंपनियों को अपने प्रोडक्ट फॉर्मूले बदलने पर मजबूर कर दिया है.

क्या है ये ‘ज़ीब्रा स्ट्रिपिंग’?
ये एक ऐसी स्ट्रैटेजी है जिसमें आप किसी पार्टी या सोशल इवेंट के दौरान बारी-बारी से (यानी एक के बाद एक) ड्रिंक्स लेते हैं. ये नाम ज़ीब्रा के शरीर पर बनी काली और सफेद स्ट्रिप्स से प्रेरित है, जो बारी-बारी से आती हैं.

‘ज़ीब्रा स्ट्रिपिंग’: ये बदलाव एक अनोखे फैशन स्टेटमेंट के साथ आया
‘ज़ीब्रा स्ट्रिपिंग’ का मतलब है बैलेंस.ये पीने की आदत में ‘पीने और न पीने’ (ब्लैक एंड व्हाइट) का एक सचेत तालमेल है.जब युवा पार्टी करते हैं, तो वे एक एल्कोहलिक ड्रिंक के बाद जानबूझकर एक नॉन-एल्कोहलिक ड्रिंक (जैसे मॉकटेल, ज़ीरो-प्रूफ ड्रिंक, या यहां तक कि सिंपल वाटर) लेते हैं. यह एक अलर्ट प्रैक्टिस है जो सुनिश्चित करता है कि वे मस्ती में रहें, लेकिन नियंत्रण न खोएं.

युवा इसे क्यों अपना रहे हैं?
• हैंगओवर के ख़तरे को टालना, वज़न बढ़ने के डर को कम करना और शरीर में अल्कोहल लेवल को बैलेंस रखना.
• अंधाधुंध पीने के बजाय, सोच-समझकर और क्वालिटी ड्रिंकिंग पर ज़ोर देते हुए ‘माइंडफुल ड्रिंकिंग’ करना.

भारतीय बाजार में ‘ज़ीब्रा’ की दहाड़
Gen Z की ये अवेयर लाइफस्टाइल भारत के 52 बिलियन डॉलर के बाज़ार में तूफान ला रही है. युवाओं के इस रुख से, भारत का नॉन-एल्कोहलिक ड्रिंक्स बाज़ार धमाकेदार ग्रोथ देख रहा है. अनुमान है कि 2033 तक ये चौंका देने वाला आँकड़ा 68 बिलियन डॉलर तक पहुँच जाएगा. इसकी बिक्री में पहले ही 17% तक की शानदार उछाल आ चुकी है.

कंपनियों का गेम-प्लान बदला: इस बदलाव को देखते हुए, Bira, Kingfisher, और Simba जैसी फेमस कंपनियाँ अब लो-अल्कोहल वाली बीयर, क्राफ्ट बीयर, और आकर्षक रेडी-टू-ड्रिंक कॉकटेल जैसे ‘ज़ीब्रा-फ्रेंडली’ उत्पाद तेज़ी से बाज़ार में उतार रही हैं. वे जानते हैं कि अब ग्राहक सिर्फ़ नशा नहीं, बल्कि विकल्प और जिम्मेदारी चाहते हैं.

‘ज़ीब्रा स्ट्रिपिंग’ महज़ एक टेम्पररी ट्रेंड नहीं है; ये एक नये ड्रिंकिंग कल्चर की शुरुआत है. ये ज़ीब्रा स्ट्रिपिंग दिखाता है कि Gen Z पीढ़ी सामाजिक जुड़ाव और आत्म-नियंत्रण के बीच एक बेहतरीन बैलेंस बनाना सीख रही है.

Chaturvedi Shruti V.

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