इज़राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू का अल्टीमेटम
बीते दिन रविवार को ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों द्वारा फिलिस्तीन को राष्ट्र के रूप में मान्यता देने के बाद अब इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने न सिर्फ फिलिस्तीन को राष्ट्र के रूप में मान्यता देने को खतरनाक कदम करार दिया है बल्कि इसके विरूद्ध संयुक्त राष्ट्र में सख्त प्रतिक्रिया देने के भी बात कही है.
‘फिलिस्तीन को मान्यता,आतंकवादियों को पुरस्कार’
नेतन्याहू का कहना है कि जो भी देश फिलिस्तीन को मान्यता दे रहे हैं, वे आतंकवादियों को पुरस्कार दे रहे हैं और फिलिस्तीन कभी पूर्ण राष्ट्र नहीं बन पाएगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इज़राइल इस मुद्दे पर अपना फैसला उनकी आगामी अमेरिका यात्रा के बाद इज़राइल लौटने पर कैबिनेट की बैठक में लिया जाएगा.
प्रधानमंत्री नेतन्याहू बुधवार को न्यूयॉर्क के लिए रवाना होने वाले हैं, जिसके बाद वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से वॉशिंगटन में मुलाकात करेंगे. यह बैठक रविवार को होगी, इसके बाद नेतन्याहू अगले बुधवार तक इज़राइल लौटेंगे.
ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों ने दी फिलिस्तीन को मान्यता
बाते दिन रविवार को ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों ने फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी है. वहीं फ्रांस, बेल्जियम और अन्य देश भी फिलिस्तीन को राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की तैयारी में हैं. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पहले ही संकेत दे चुके हैं कि उनका देश जल्द ही फिलिस्तीन को मान्यता देगा.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए कहा था कि ‘आज फ़िलस्तीनियों और इज़राइलियों के लिए शांति की उम्मीद और दो-राष्ट्र समाधान को फिर से ज़िंदा करने के लिए ब्रिटेन ने औपचारिक रूप से फ़िलिस्तीन को एक देश के रूप में मान्यता दी है.’ उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ‘इस घोषणा को हमास से नहीं जोड़ना चाहिए और यह समाधान हमास को किसी तरह का इनाम नहीं है.’
इज़राइल ने जताया सख्त विरोध
वहां इसके विरोध में इज़राइल के विदेश मंत्रालय ने जवाब देते हुए कहा कि ‘फिलिस्तीन को राष्ट्र के रूप में मान्यता देना “जिहादी हमास को इनाम देने के अलावा कुछ नहीं है.” नेतन्याहू ने भी सोशल मीडिया पर पश्चिमी देशों के इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा था कि ‘यह कदम कूटनीति नहीं बल्कि हमास के आतंक को बढ़ावा देने जैसा है. यह हमास की कैद में मौजूद बंधकों को न छोड़ने के फ़ैसले को और मज़बूती देता है.’
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