नई दिल्ली,23 अप्रैल 2026: भारत-नेपाल सीमा पर व्यापार को लेकर हाल के दिनों में स्थिति काफी सख्त हो गई है। सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में इसे “अनौपचारिक नाकाबंदी” बताया जा रहा है, हालांकि नेपाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी भारतीय उत्पादों पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।
दरअसल, प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व में नेपाल सरकार ने अप्रैल 2026 के मध्य से कस्टम नियमों को सख्ती से लागू करना शुरू कर दिया है, जिससे सीमा पार रोजमर्रा के व्यापार पर बड़ा असर पड़ा है।
नए सख्त प्रवर्तन के तहत अब भारत से नेपाल ले जाए जाने वाले 100 नेपाली रुपये (करीब ₹63) से अधिक मूल्य के सामान पर अनिवार्य कस्टम ड्यूटी लगाई जा रही है। यह ड्यूटी 5% से लेकर 80% तक हो सकती है। इसका असर सबसे ज्यादा रोजमर्रा की चीजों—जैसे किराना, कपड़े और फल—पर पड़ रहा है, जिन्हें लोग आमतौर पर बिना ज्यादा जांच के सीमा पार ले जाते थे।
इसके साथ ही बिरगंज, बनबसा और नेपालगंज जैसे प्रमुख बॉर्डर पॉइंट्स पर जांच काफी कड़ी कर दी गई है। Armed Police Force (APF) Nepal द्वारा बैग और वाहनों की गहन तलाशी ली जा रही है। यहां तक कि भारतीय नंबर प्लेट वाले निजी वाहनों के नेपाल में प्रवेश के लिए भी अब सख्त अनुमति प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
इस सख्ती का सीधा असर उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती बाजारों पर पड़ा है, जहां नेपाली ग्राहकों की संख्या में तेज गिरावट दर्ज की गई है। छोटे व्यापारियों का कहना है कि उनकी बिक्री पर इसका बड़ा असर पड़ा है।
नेपाल सरकार का कहना है कि ये नियम नए नहीं हैं, बल्कि पहले से मौजूद कानूनों को अब सख्ती से लागू किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, इसका उद्देश्य अनौपचारिक सीमा पार व्यापार से होने वाले राजस्व नुकसान को रोकना, स्थानीय बाजार और कारोबारियों की रक्षा करना और आर्थिक दबाव के समय राष्ट्रीय आय बढ़ाना है।
हालांकि, इन सख्त कदमों के खिलाफ सीमा क्षेत्रों और राजधानी काठमांडू में विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गए हैं। कई लोग इसे “बिना घोषणा की नाकाबंदी” बता रहे हैं, उनका कहना है कि इससे आम लोगों पर सीधा असर पड़ रहा है, जो सस्ते भारतीय सामान पर निर्भर रहते हैं।
यह पहला मौका नहीं है जब नेपाल ने भारतीय उत्पादों पर कार्रवाई की हो। मई 2024 में नेपाल ने MDH और Everest जैसे ब्रांड्स के कुछ मसालों—जैसे मद्रास करी पाउडर और सांभर मसाला—पर गुणवत्ता संबंधी चिंताओं के चलते प्रतिबंध लगाया था। इसके अलावा हाल में कुछ पैकेज्ड ड्रिंक्स और फलों के प्रवेश पर भी सीमित रोक की खबरें सामने आई हैं।
कुल मिलाकर, भारत-नेपाल व्यापार पर यह सख्ती दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों में आर्थिक और सामाजिक असर डाल रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह स्थिति अस्थायी रहती है या फिर दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है।
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