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Nepal Flood: लापता लोगों की तलाश में भारत ने भेजी 11 एक्सपर्ट की टीम, सुरंगों में फंसे लोगों को बचाने की चुनौती

नेपाल में ग्लेशियर टूटने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ ने पूरे हिमालयी क्षेत्र को हिला दिया है. इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 626 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,400 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इसी बीच भारत ने नेपाल की मदद के लिए 11 सदस्यों वाली विशेषज्ञ टीम भेजी है। टीम में मेडिकल और टनल-रेस्क्यू विशेषज्ञ शामिल हैं, जो बाढ़ के बाद सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के अभियान में मदद करेंगे।

भारत की 11 सदस्यीय टीम नेपाल पहुंची

नेपाल की अपील के बाद भारत ने विशेषज्ञों की टीम भेजी है। इस टीम का फोकस खास तौर पर उन लोगों को बचाने पर है, जिनके हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में फंसे होने की आशंका है।

बाढ़ और मलबे ने नेपाल के रासुवा और आसपास के इलाकों में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भी भारी नुकसान पहुंचाया है।कई कर्मचारी अब तक लापता हैं. ऐसे में सुरंगों के भीतर पहुंचना बचाव दल के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बना हुआ है।.

626 मौतें, 2,400 से ज्यादा लोग लापता

नेपाल सरकार के मुताबिक 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद बड़े पैमाने पर तबाही हुई। अब तक 626 शव बरामद किए जा चुके हैं और करीब 2,400 लोग अब भी लापता हैं।

हालांकि अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर देखने को मिल रहा है और बचाव अभियान जारी रहने के साथ संख्या बदल सकती है। नेपाल सरकार ने कहा है कि फिलहाल उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों को ढूंढना और जीवित बचे लोगों को सुरक्षित निकालना है।

आखिर इतनी भयानक तबाही कैसे हुई?

इस आपदा की शुरुआत नेपाल-चीन सीमा के पास ग्लेशियर से जुड़ी एक बड़ी घटना के बाद हुई. बर्फ, चट्टान और मलबे का भारी हिस्सा नीचे की ओर आया और इससे नदियों में अचानक पानी और मलबे का बहाव बढ़ गया।

देखते ही देखते तेज बहाव ने सड़कें, पुल, घर और हाइड्रोपावर परियोजनाओं से जुड़ी संरचनाओं को अपनी चपेट में ले लिया. पहाड़ी इलाकों में भारी मलबा जमा होने के कारण कई रास्ते कट गए और दूरदराज के इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो गया।

सबसे बड़ी चिंता-सुरंगों में फंसे लोग

बाढ़ का पानी और मलबा कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों तक पहुंच गया। इन सुरंगों में काम करने वाले कर्मचारियों में से कई लोगों के अब तक लापता होने की खबर है।

नेपाल की सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां लगातार बचाव अभियान चला रही हैं।कई कर्मचारियों को सुरंगों से बाहर निकाला जा चुका है, लेकिन कुछ जगहों पर मलबा और पानी रास्ते में बड़ी बाधा बना हुआ है. ऐसे में भारत से पहुंची विशेषज्ञ टीम की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

रेस्क्यू के बीच फिर बाढ़ का खतरा

नेपाल के सामने सिर्फ लापता लोगों को ढूंढने की चुनौती नहीं है। पहाड़ी इलाकों में मलबे के कारण कई जगह पानी रुकने से नई झीलें और अस्थायी जलाशय बनने का खतरा पैदा हो गया है।

अगर इन जलाशयों की प्राकृतिक दीवार टूटती है, तो नीचे की ओर अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा आ सकता है. इसी वजह से बचाव दलों को एक तरफ लापता लोगों की तलाश करनी पड़ रही है, तो दूसरी तरफ संभावित नए फ्लैश फ्लड पर भी नजर रखनी पड़ रही है।

भारत की मदद क्यों अहम है?

नेपाल में कई जगह सड़कें और पुल बह जाने के कारण राहत एवं बचाव अभियान प्रभावित हुआ है. ऐसे में भारत की विशेषज्ञ सहायता सिर्फ लोगों की तलाश तक सीमित नहीं है। नेपाल ने बुनियादी संपर्क बहाल करने के लिए भारत और चीन से अस्थायी Bailey bridges की मदद भी मांगी है।

भारत की टीम खास तौर पर उन जटिल रेस्क्यू ऑपरेशनों में तकनीकी सहायता दे रही है, जहां सामान्य बचाव उपकरणों से काम करना मुश्किल है।

मौसम भी बना रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा

बचाव दलों के लिए खराब मौसम और पहाड़ी इलाकों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियां बड़ी चुनौती बनी हुई हैं. कई क्षेत्रों में लगातार बारिश और अस्थिर जमीन के कारण अभियान को रोकना या रास्ता बदलना पड़ रहा है।

इसके बावजूद नेपाल सेना, पुलिस और विशेषज्ञ टीमें लगातार लापता लोगों को तलाश रही हैं। भारत की 11 सदस्यीय टीम के पहुंचने से सुरंगों और अन्य जटिल स्थानों पर चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन को तकनीकी मदद मिलने की उम्मीद है।

नेपाल के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती क्या?

नेपाल के सामने फिलहाल तीन बड़ी चुनौतियां हैं—लापता लोगों की तलाश, सुरंगों में फंसे कर्मचारियों का रेस्क्यू और नए फ्लैश फ्लड के खतरे से निपटना।

626 लोगों की मौत और करीब 2,400 लोगों के लापता होने के बाद राहत एवं बचाव अभियान बेहद संवेदनशील दौर में है।भारत की विशेषज्ञ टीम के पहुंचने से उम्मीद जगी है कि मुश्किल सुरंगों और मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के अभियान को नई तकनीकी मदद मिलेगी।

news desk

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