नई दिल्ली: NEET 2026 की तैयारियों के बीच नेशनल मेडिकल कमीशन ने मेडिकल कॉलेजों के लिए एक सख्त निर्देश जारी किया है। कमीशन ने साफ कहा है कि कॉलेज अपने छात्रों को अनावश्यक छुट्टियां न दें और उनकी पढ़ाई व क्लिनिकल ट्रेनिंग में कोई रुकावट नहीं आने दें।
NMC के मुताबिक, मेडिकल एजुकेशन सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं है—इसमें हॉस्पिटल ट्रेनिंग और प्रैक्टिकल एक्सपोजर भी उतना ही जरूरी है। ऐसे में बार-बार छुट्टियां देने से स्टूडेंट्स की ट्रेनिंग प्रभावित होती है, जो आगे चलकर उनकी प्रोफेशनल स्किल्स पर असर डाल सकती है।
क्यों लिया गया ये फैसला?
दरअसल, कुछ कॉलेजों में यह देखा गया कि अलग-अलग कारणों से छात्रों को छुट्टियां दी जा रही थीं, जिससे उनकी अटेंडेंस और ट्रेनिंग प्रभावित हो रही थी। इसी को देखते हुए NMC ने सभी मेडिकल कॉलेजों को निर्देश दिया है कि वे अकादमिक कैलेंडर का सख्ती से पालन करें और बिना जरूरी वजह के छुट्टियां देने से बचें।
स्टूडेंट्स के लिए क्या मतलब?
सीधी बात—अब मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए “लंबी छुट्टियां” लेना आसान नहीं होगा। उन्हें रेगुलर क्लासेस, प्रैक्टिकल्स और हॉस्पिटल ड्यूटी में लगातार शामिल रहना पड़ेगा।
हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह फैसला स्टूडेंट्स के फ्यूचर के लिहाज से फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि इससे उनकी ट्रेनिंग ज्यादा मजबूत होगी और वे असली मेडिकल सिचुएशन्स के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो पाएंगे।
कुल मिलाकर…
NMC का यह कदम साफ संकेत देता है कि मेडिकल एजुकेशन में अब ढिलाई नहीं चलेगी। पढ़ाई और ट्रेनिंग दोनों में फुल फोकस रखना होगा—क्योंकि आखिरकार बात मरीजों की जिंदगी से जुड़ी है।