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सुनेत्रा पवार के शपथग्रहण से पहले शरद पवार हुए भावुक, बोले– “एनसीपी को एक करना चाहते थे अजित”

बारामती से महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर भावनाओं और सत्ता की गूंज सुनाई दी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के संस्थापक और एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने आज बारामती में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेहद भावुक होकर अपने दिवंगत भतीजे और महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार को याद किया। उन्होंने खुलासा किया कि अजित पवार की आखिरी इच्छा एनसीपी के दोनों गुटों का विलय करना थी, ताकि पार्टी फिर से एकजुट होकर आगे बढ़ सके। शरद पवार ने कहा कि अजित नहीं चाहते थे कि पार्टी बंटी रहे और इसी सोच के साथ पिछले कुछ महीनों से अंदरखाने बातचीत चल रही थी।

अधूरी रह गई इच्छा

शरद पवार ने बताया कि पिछले चार महीनों से इस विलय को लेकर लगातार सकारात्मक चर्चा हो रही थी। इस पूरी प्रक्रिया की अगुवाई खुद अजित पवार कर रहे थे और उनके साथ जयंत पाटिल व शशिकांत शिंदे भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे। बारामती में शरद पवार के आवास पर कई अहम बैठकें हुईं, जहां लगभग सभी मुद्दों पर सहमति बन चुकी थी। यहां तक कि 12 फरवरी को दोनों गुटों के औपचारिक विलय के ऐलान की तारीख भी तय कर ली गई थी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और इससे पहले ही अजित पवार का असमय निधन हो गया। शरद पवार ने कहा कि अजित भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यह आखिरी इच्छा जरूर पूरी होनी चाहिए और इसकी जिम्मेदारी अब पार्टी के सभी नेताओं पर है।
अजित पवार की मौत के महज तीन दिन बाद यह बयान सामने आया है, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। इसी बीच यह खबरें भी सामने आईं कि अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को मुंबई में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। इस पर शरद पवार ने साफ शब्दों में कहा कि सुनेत्रा पवार को लेकर उनसे कोई चर्चा नहीं हुई है और उन्हें किसी शपथ ग्रहण की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि फिलहाल एनसीपी से जुड़े फैसले मुंबई में हो रहे हैं और उनसे कोई राय नहीं ली जा रही।

बीजेपी को लेकर अफवाहें, गठबंधन पर साफ संदेश

शरद पवार ने एनसीपी के भविष्य और गठबंधन को लेकर चल रही अटकलों पर भी विराम लगाने की कोशिश की। उन्होंने स्पष्ट किया कि विलय का मतलब बीजेपी या एनडीए के साथ जाना नहीं है। उनके मुताबिक, बीजेपी के साथ जाने की बातें सिर्फ मीडिया की अफवाहें हैं और एनसीपी की विचारधारा उनसे बिल्कुल अलग है। उन्होंने दो टूक कहा कि पार्टी बीजेपी के साथ नहीं जाएगी।

राजनीतिक जानकारों की मानें तो अगर एनसीपी के दोनों गुटों का विलय होता है, तो इसका सीधा असर मौजूदा महायुति सरकार पर पड़ सकता है। अजित पवार गुट फिलहाल बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ सत्ता में है, जबकि शरद पवार की एनसीपी (एसपी) विपक्ष में मजबूत स्थिति बनाए हुए है। ऐसे में विलय की सूरत में गठबंधन के समीकरण बदल सकते हैं।

2023 में पार्टी के विभाजन के बाद से एनसीपी दो हिस्सों में बंटी हुई थी, लेकिन हाल के महीनों में एकजुट होने की कोशिशें तेज हुई थीं। शरद पवार का यह भावुक बयान न सिर्फ अजित पवार की यादों से जुड़ा है, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले महाराष्ट्र की राजनीति को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

news desk

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