नई दिल्ली: भारत में निवेश बढ़ाने, आधुनिक विनिर्माण को गति देने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में देश की हिस्सेदारी मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार लगातार विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईज़ेड) से जुड़े नियमों में बदलाव कर रही है। वर्ष 2025 में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए नियमों में संशोधन किए गए थे, जबकि 2026 में भी एसईज़ेड नियमों में नए बदलाव अधिसूचित किए गए हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर एसईज़ेड क्या है, यह कैसे काम करता है और कंपनियां इसके जरिए क्या लाभ हासिल करती हैं।
एसईज़ेड यानी विशेष आर्थिक क्षेत्र ऐसा औद्योगिक इलाका होता है, जिसे सरकार विशेष रूप से अधिसूचित करती है। यहां कारोबार और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सामान्य क्षेत्रों की तुलना में अलग नियामकीय व्यवस्था लागू होती है। इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी निवेश आकर्षित करना, निर्यात बढ़ाना और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना है। इसका संचालन विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम, 2005 और उससे जुड़े नियमों के तहत किया जाता है।
भारत ने वर्ष 2000 में विशेष आर्थिक क्षेत्र नीति लागू की थी। इसके बाद संसद ने विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम, 2005 पारित किया, जो 10 फरवरी 2006 से प्रभावी हुआ। इस व्यवस्था का उद्देश्य उद्योगों को ऐसा माहौल देना था, जहां वे कम प्रशासनिक बाधाओं के साथ उत्पादन और निर्यात कर सकें।
विशेष आर्थिक क्षेत्र को देश के भीतर एक अलग आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाता है। यहां स्थापित कंपनियों के लिए कारोबार करना अपेक्षाकृत आसान बनाया जाता है और विदेशों में सामान भेजने वाली इकाइयों को विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
विशेष आर्थिक क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों को कारोबार संचालन में कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं। इनमें मंजूरी की आसान प्रक्रिया, बेहतर बुनियादी ढांचा, निर्यात को बढ़ावा देने वाली व्यवस्थाएं और सीमा शुल्क से जुड़े विशेष प्रावधान शामिल हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य उद्योगों के लिए कारोबार का वातावरण अधिक अनुकूल बनाना है।
केंद्र सरकार का मानना है कि विशेष आर्थिक क्षेत्रों के माध्यम से बड़े घरेलू और विदेशी निवेश आकर्षित किए जा सकते हैं। साथ ही उच्च तकनीक आधारित विनिर्माण को बढ़ावा देकर भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का मजबूत केंद्र बनाया जा सकता है। केंद्रीय बजट 2026-27 के अनुसार, 28 फरवरी 2026 तक देश में 368 अधिसूचित विशेष आर्थिक क्षेत्र मौजूद थे।
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