उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। सपा अपनी संगठनात्मक ताकत बढ़ाने के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रही है। इस दौरान पार्टी के मुस्लिम चेहरे के रूप में आजम खान एक बड़ा नाम हैं, और अब इसी कड़ी में नया नाम जुड़ गया है। बसपा प्रमुख मायावती के एक समय राइटहैंड माने जाने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी कांग्रेस से होते हुए अब सपा में शामिल हो गए हैं।
इस दौरान जब वो सपा में शामिल हो रहे थे तब उन्होंने एक शेर से अपनी बात रखने की कोशिश की है और कहा कि “हयात लेके चलो, कायनात लेके चलो चलो तो सारे जमाने को साथ लेके चलो”, उनके इस शेर के कई मायने निकाले जा रहे हैं।
सपा में पहले से ही कई कद्दावर मुस्लिम नेता मौजूद हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या नसीमुद्दीन सिद्दीकी आजम खान की तरह मजबूत मुस्लिम चेहरा बनकर पार्टी में अपनी अलग पहचान बना पाएंगे।
अखिलेश के लिए नसीमुद्दीन सिद्दीकी क्यों महत्वपूर्ण हैं?
मुस्लिम वोट बैंक: नसीमुद्दीन सिद्दीकी को पश्चिमी यूपी से लेकर बुंदेलखंड तक मुस्लिम समाज का प्रमुख चेहरा माना जाता है। बांदा और आसपास के जिलों में उनका मजबूत जमीनी आधार है। तीन दशकों तक संगठन चलाने का उनका अनुभव सपा के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को और मजबूत कर सकता है।
क्या 2027 की बाजी पलट सकती है यह जोड़ी?
अखिलेश यादव अब केवल अपने पुराने कैडर पर निर्भर नहीं हैं। वह बसपा और कांग्रेस के पुराने दिग्गज नेताओं को जोड़ रहे हैं, जिनके पास मजबूत ग्राउंड कनेक्ट है।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी, अनीस अहमद और पूर्वांचल के अन्य नेताओं का सपा में शामिल होना यह संकेत देता है कि अखिलेश सोशल इंजीनियरिंग के जरिए बीजेपी को घेरने की तैयारी कर चुके हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मायावती के पूर्व सिपहसालार सिद्दीकी अखिलेश यादव को 2027 में सत्ता की कुर्सी तक पहुंचा पाएंगे।
क्या नसीमुद्दीन सिद्दीकी बन पाएंगे आजम खान का विकल्प?
आजम खान सपा के संस्थापक सदस्य हैं और लंबे समय से पार्टी के मुस्लिम चेहरे के रूप में जाने जाते हैं। एक दौर ऐसा था जब आजम खान के बिना सपा में एक पत्ता भी नहीं हिलता था, लेकिन बीजेपी सरकार के आने के बाद उन पर कानूनी शिकंजा कसा गया। बावजूद इसके, आजम के सियासी तेवर ढीले नहीं पड़े।
2025 में जब आजम सीतापुर जेल से जमानत पर रिहा हुए, तो अखिलेश यादव ने नपे-तुले अंदाज में उनकी हर शर्त मानते हुए उनसे मुलाकात की थी। जेल में बंद होने के बावजूद आजम खान आज भी सपा के प्रमुख मुस्लिम चेहरा बने हुए हैं।
इसी दौरान नसीमुद्दीन सिद्दीकी सपा की साइकिल पर सवार हुए हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या वे आजम खान का स्थान सपा में पूरी तरह ले पाएंगे।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी भले ही आजम खान की तरह मुस्लिम वोट बैंक में सर्वमान्य चेहरा नहीं रहे, लेकिन बुंदेलखंड और पश्चिमी यूपी में उनकी पकड़ मजबूत है। ऐसे में उनके सियासी नेटवर्क से सपा को लाभ मिलेगा, लेकिन बसपा जैसा प्रभाव हासिल करना उनके लिए आसान नहीं होगा।
कांग्रेस से अलविदा कहकर सपा में शामिल हुए पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपने समर्थकों के साथ अखिलेश यादव की मौजूदगी में पार्टी में प्रवेश किया।
सपा में शामिल होने के मौके पर नसीमुद्दीन सिद्दीकी के साथ प्रतापगढ़ के पूर्व विधायक राजकुमार पाल, देवरिया के पूर्व विधायक दीनानाथ कुशवाहा, पूर्व मंत्री अनीस अहमद फूल बाबू और एआईएमआईएम के नेता दानिश खान सहित सैकड़ों नेता और उनके समर्थक मौजूद थे।
बसपा से राजनीति की शुरुआत करने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी कभी मायावती के राइटहैंड और बसपा के सबसे बड़े मुस्लिम चेहरे माने जाते थे। लेकिन अब सपा में पहले से ही पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी यूपी तक कई कद्दावर मुस्लिम नेता मौजूद हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि सपा की साइकल पर सवार हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी अपनी सियासी जगह कैसे बनाएंगे।