नहीं रहे छन्नू लाल मिश्र
शास्त्रीय संगीत जगत से वाराणसी से एक शोकपूर्ण खबर आई. उपशास्त्रीय गायकी के दिग्गज और पद्मविभूषण सम्मानित पं. छन्नूलाल मिश्र ने दुनिया को अलविदा कह दिया. गुरुवार को भोर में लगभग साढ़े चार बजे पं. छन्नूलाल मिश्र ने 92 वर्ष की आयु में मिर्जापुर में अंतिम सांस ली. उनके जाने से वाराणसी समेत पूरे संगीत जगत में शोक का माहौल है.
परिजनों के मुताबिक बुधवार देर रात उनकी तबीयत अचानक से बिगड़ गई थी, जिसके बाद आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया. जहां डॉक्टरों ने सुबह उन्हें मृत घोषित कर दिया. उनके पुत्र और विख्यात तबला वादक पं. रामकुमार मिश्र भी दिल्ली से वाराणसी के लिए रवाना हो चुके हैं.
आजमगढ़ से उठी थी सुरों की गूंज
1936 में आजमगढ़ में जन्मे पं. छन्नूलाल मिश्र ने वाराणसी और किराना घराने की परंपरा को नई ऊंचाइयां दीं. ठुमरी, दादरा, चैती और कजरी में उनकी गायकी अप्रतिम मानी जाती है. उन्हें 2000 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2010 में पद्मभूषण और 2020 में पद्मविभूषण से नवाजा गया. 2014 में वे लोकसभा चुनाव में वाराणसी से नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक भी रहे थे.
पं. छन्नूलाल मिश्र के निधन से भारतीय संगीत जगत में शून्य पैदा हो गया है. उन्हें ठुमरी गायन की परंपरा में गिरिजा देवी के बाद अंतिम स्तंभ माना जाता था.
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