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ईरान के ‘पिकैक्स माउंटेन’ में बढ़ी हलचल, सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ाई परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता

तेहरान। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ गई है। नतांज के पास स्थित बेहद सुरक्षित भूमिगत परिसर ‘पिकैक्स माउंटेन’ में 2026 के दौरान निर्माण गतिविधियों में तेज बढ़ोतरी सामने आई है। अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) ने 2020 से अब तक की सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर यह आकलन किया है।

CSIS के मुताबिक, 2026 में इस इलाके में पिछले छह वर्षों की तुलना में सबसे ज्यादा गतिविधियां देखी गई हैं। तस्वीरों में सुरंगों के प्रवेश द्वारों को मजबूत करने, आंतरिक सड़कों को विकसित करने, पहुंच वाले क्षेत्रों को सुदृढ़ करने और खुदाई से निकली मिट्टी को हटाने जैसी गतिविधियां नजर आती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि साइट अब शुरुआती खुदाई के चरण से आगे बढ़कर संभावित आंतरिक निर्माण और बाहरी ढांचे को मजबूत करने के चरण में पहुंच गई है।

नतांज के बेहद करीब है भूमिगत परिसर

पिकैक्स माउंटेन, जिसे फारसी में कुह-ए कोलांग गज ला कहा जाता है, नतांज परमाणु परिसर से करीब दो किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। यह ग्रेनाइट की पहाड़ी के भीतर विकसित किया जा रहा गहरा भूमिगत टनल कॉम्प्लेक्स है। इसकी वजह से यह स्थान ईरान के परमाणु ढांचे को लेकर बेहद संवेदनशील माना जाता है।

हालांकि, सैटेलाइट तस्वीरों से इस बात की पुष्टि नहीं होती कि इस परिसर के भीतर इस समय परमाणु संवर्धन किया जा रहा है। CSIS ने भी कहा है कि उपलब्ध तस्वीरें न तो इस दावे की पुष्टि करती हैं और न ही इसे पूरी तरह खारिज करती हैं कि ईरान ने यहां यूरेनियम संवर्धन से जुड़े सेंट्रीफ्यूज पहुंचाए हैं।

क्या सेंट्रीफ्यूज असेंबली की तैयारी?

पिकैक्स माउंटेन को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसके संभावित इस्तेमाल का है। 2020 में ईरान के तत्कालीन परमाणु प्रमुख अली अकबर सालेही ने नतांज के पास एक भूमिगत सेंट्रीफ्यूज असेंबली सुविधा बनाने की जानकारी दी थी। इसी वजह से विशेषज्ञ इस भूमिगत परिसर को सेंट्रीफ्यूज से जुड़ी गतिविधियों से जोड़कर देख रहे हैं।

CSIS ने इसके अलावा यह संभावना भी जताई है कि भविष्य में इस परिसर का इस्तेमाल यूरेनियम संवर्धन या परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी अन्य गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। हालांकि, फिलहाल उपलब्ध ओपन-सोर्स तस्वीरें इनमें से किसी संभावना की निर्णायक पुष्टि नहीं करती हैं।

440 किलो 60 फीसदी संवर्धित यूरेनियम का मुद्दा

ईरान के पास करीब 440 किलोग्राम 60 फीसदी तक संवर्धित यूरेनियम होने का भी उल्लेख विशेषज्ञों की रिपोर्ट में किया गया है। यही वजह है कि पिकैक्स माउंटेन में चल रही गतिविधियों को लेकर चिंता और बढ़ गई है। हालांकि, मौजूदा साक्ष्यों से यह साबित नहीं होता कि इस परिसर में उस सामग्री को हथियार-ग्रेड स्तर तक संवर्धित करने की क्षमता मौजूद है।

अमेरिका की नजर में क्यों अहम है पिकैक्स माउंटेन?

भूमिगत ढांचे और मजबूत सुरंगों की वजह से पिकैक्स माउंटेन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही इस स्थल को लेकर सैन्य कार्रवाई की संभावना की चेतावनी दे चुके हैं। 10 सितंबर 2026 को ट्रंप ने एक बार फिर यहां देखी जा रही गतिविधियों को लेकर ईरान को चेतावनी दी।

ऐसे में पिकैक्स माउंटेन अब केवल ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह अमेरिका-ईरान तनाव का एक अहम केंद्र भी बन गया है। हालांकि, सैटेलाइट तस्वीरों में गतिविधियां बढ़ने की पुष्टि होती है, लेकिन इस परिसर का वास्तविक मौजूदा उपयोग अभी भी स्वतंत्र रूप से स्पष्ट नहीं है।

news desk

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