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महाराष्ट्र में अटका मानसून, देशभर में 41% कम हुई बारिश! जानिए क्या होगा खेती और मौसम पर असर

नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में मानसून की रफ्तार अचानक धीमी पड़ने से बारिश का इंतजार लंबा हो गया है। मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र के दक्षिणी हिस्सों में मानसून के ठहर जाने का असर अब पूरे देश में दिखाई देने लगा है। स्थिति ऐसी है कि अब तक सामान्य से 41 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे कृषि और मौसम दोनों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

18 जून तक सामान्य से काफी कम दर्ज हुई बारिश

मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार 4 जून से 18 जून के बीच देशभर में सामान्य तौर पर 72.2 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस अवधि में केवल 42.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई। इससे स्पष्ट है कि मानसून की प्रगति अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाई है।

महाराष्ट्र के दक्षिणी हिस्सों में क्यों अटक गया मानसून?

मौसम विभाग के अनुसार बड़े पैमाने पर अनुकूल मौसमी परिस्थितियां नहीं बनने के कारण मानसून पिछले कुछ दिनों से आगे नहीं बढ़ सका। इसके पीछे कई प्रमुख कारण बताए गए हैं।

सबसे बड़ा कारण अरब सागर से आने वाली तूफानी लहरों की कमी माना गया है। सामान्य परिस्थितियों में यही लहरें नमी लेकर आती हैं और व्यापक बारिश के जरिए मानसून को आगे बढ़ाने में मदद करती हैं।

कमजोर हवाएं भी बनीं मानसून की रफ्तार थमने की वजह

दूसरा कारण मानसून से जुड़ी दक्षिण-पश्चिमी हवाओं का अरब सागर के ऊपर कमजोर पड़ना बताया गया है। इसके अलावा भूमध्य रेखा पार करके आने वाली हवाओं की सक्रियता भी पश्चिमी हिंद महासागर और अरब सागर क्षेत्र में कम बनी हुई है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यही हवाएं मानसून के लिए नमी का मुख्य स्रोत होती हैं। इनके कमजोर होने से बारिश की तीव्रता और विस्तार दोनों प्रभावित होते हैं।

लो प्रेशर सिस्टम की कमी और एमजेओ की कमजोरी का असर

मौसम विभाग ने बताया कि मानसून को आगे बढ़ाने वाले सिस्टम, जैसे अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के ऊपर बनने वाले कम दबाव वाले क्षेत्र, फिलहाल सक्रिय नहीं हैं। यही वजह भी मानसून की गति को प्रभावित कर रही है।

इसके साथ ही मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (एमजेओ) की गतिविधि भी कमजोर बताई गई है। यह एक ऐसा मौसमी तंत्र है जो भूमध्य रेखा के आसपास बादलों, हवा और दबाव की स्थिति को प्रभावित करता है और बारिश बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अल नीनो और कमजोर मानसून से बढ़ी खेती की चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की धीमी चाल और हाल में अल नीनो जैसी परिस्थितियों का प्रभाव आगे चलकर बारिश को और प्रभावित कर सकता है। भारत में अल नीनो को अक्सर कमजोर मानसून से जोड़कर देखा जाता है।

इसका सबसे ज्यादा असर खरीफ फसलों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि इन फसलों की बेहतर वृद्धि के लिए समय पर और पर्याप्त वर्षा जरूरी मानी जाती है।

 

vineet verma

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