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मिडिल ईस्ट तनाव का असर अब थाली पर, तेल-दाल ने बिगाड़ा घर का बजट, सरसों तेल 175 रुपये लीटर पहुंचा

प्रयागराज में बीते कुछ हफ्तों के भीतर खाद्य तेलों और दालों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वैश्विक तनाव का असर अब स्थानीय बाजारों में साफ दिखाई देने लगा है। खासकर ईरान और इस्राइल के बीच जारी संघर्ष के बाद खाद्य तेलों की सप्लाई और कीमतों को लेकर बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। इसका सीधा असर आम लोगों की रसोई पर पड़ रहा है।

सरसों और रिफाइंड तेल ने बढ़ाई रसोई की चिंता

स्थानीय व्यापारियों के अनुसार महज 20 से 25 दिनों के भीतर सरसों तेल और रिफाइंड की कीमतों में 10 से 20 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा हुआ है। कुछ दिन पहले तक सरसों का तेल 145 से 150 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था, जो अब 170 से 175 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। इसी तरह रिफाइंड तेल का दाम 150 रुपये से बढ़कर 160 रुपये प्रति लीटर हो गया है।

अरहर, उड़द और मूंग दाल भी हुई महंगी

तेल के साथ-साथ दालों की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। अरहर दाल, जो पहले 110 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, अब 120 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। कई फुटकर दुकानों पर इसका भाव 130 रुपये प्रति किलो तक बताया जा रहा है। उड़द दाल 130 रुपये प्रति किलो बिक रही है, जबकि मूंग दाल 110 से 120 रुपये प्रति किलो के बीच पहुंच गई है।

थोक बाजार से फुटकर तक बढ़ा दबाव

फुटकर कारोबारियों के मुताबिक अगर अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो खाद्य तेलों के दाम में और बढ़ोतरी हो सकती है। व्यापारियों का मानना है की थोक बाजार में 15 लीटर सरसों तेल का डिब्बा, जो पहले 2400 रुपये में उपलब्ध था, अब 2600 रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह 15 लीटर रिफाइंड का भाव 2300 रुपये से बढ़कर 2400 रुपये हो गया है।

आटा भी महंगा, आम आदमी की थाली प्रभावित

केवल तेल और दाल ही नहीं, बल्कि गेहूं का आटा भी महंगा हुआ है। फुटकर बाजार में आटा अब 44 से 48 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। व्यापारियों का कहना है कि अगर सप्लाई की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो रोजमर्रा की जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतें और बढ़ सकती हैं।


समुद्री रूट बदलने से बढ़ी आयात लागत

रिफाइंड तेल के लिए सोया क्रूड ब्राजील और अर्जेंटीना से आता है, जबकि पाम ऑयल मलेशिया और इंडोनेशिया से आयात किया जाता है। समुद्री मार्गों में बदलाव और परिवहन लागत बढ़ने का असर अब सीधे भारतीय बाजारों में दिखाई दे रहा है।

अंतरराष्ट्रीय तनाव का स्थानीय बाजार पर असर

एक्सपर्ट्स के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और समुद्री परिवहन लागत बढ़ने की आशंका से बाजार प्रभावित हुआ है। उनके मुताबिक स्टॉक रखने वाले कारोबारी भी सक्रिय हो गए हैं, बाजार में भी असर दिखाई दे रहा है।

news desk

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