मेटल मार्केट सुपर साइकल 2025
वैश्विक कमोडिटी बाजार में 2025 धातुओं के नाम रहा। चांदी, कॉपर और निकल जैसी इंडस्ट्रियल मेटल्स की कीमतों में साल भर में जोरदार उछाल देखने को मिला। इसकी सबसे बड़ी वजह रही ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में तेज होती मांग, जबकि सप्लाई साइड पर लगातार चुनौतियां बनी रहीं। नतीजा यह हुआ कि इन मेटल्स ने निवेशकों को चौंकाने वाले रिटर्न दिए। आइए जानते हैं 2025 में चांदी, कॉपर और निकल का पूरा हाल।
2025 में चांदी ने बाजार में इतिहास रच दिया। साल के अंत तक चांदी की कीमतों में 155% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। फिलहाल चांदी करीब 74–75 डॉलर प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रही है, जबकि हाल ही में यह 83.62 डॉलर प्रति औंस के ऑल-टाइम हाई तक पहुंच चुकी है। सिर्फ दिसंबर महीने में ही MCX पर चांदी 35% उछली। इस जबरदस्त तेजी के पीछे
सोलर पैनल्स में बढ़ता इस्तेमाल, इंडस्ट्रियल डिमांड और निवेशकों की मजबूत दिलचस्पी रही। हालांकि, हाल के दिनों में थोड़ी गिरावट देखने को मिली है, जिसे बाजार में सट्टेबाजी और CME द्वारा मार्जिन बढ़ाने के फैसले से जोड़ा जा रहा है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि 2026 में चांदी 100 डॉलर प्रति औंस का स्तर भी पार कर सकती है, लेकिन वोलैटिलिटी का खतरा बना रहेगा।
कॉपर ने भी 2025 में निवेशकों को निराश नहीं किया। साल भर में कॉपर की कीमतें करीब 42% बढ़कर 5.65 डॉलर प्रति पाउंड तक पहुंच गईं, जो पिछले 15 वर्षों की सबसे बड़ी वार्षिक तेजी मानी जा रही है। रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स, इलेक्ट्रिक
वाहनों और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में कॉपर की भारी मांग इसकी कीमतों को सपोर्ट कर रही है। दूसरी ओर, खदानों में रुकावट, श्रम लागत में इजाफा और अमेरिकी टैरिफ को लेकर अनिश्चितता ने सप्लाई को दबाव में रखा। गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, 2026 में कीमतों में थोड़ी नरमी आ सकती है, लेकिन लंबी अवधि में कॉपर 15,000 डॉलर प्रति टन तक जा सकता है। यही वजह है कि मार्केट में अब कॉपर को “अगली चांदी” तक कहा जाने लगा है।
निकल की बात करें तो 2025 में यह ज्यादातर समय स्थिर रहा, लेकिन साल के आखिर में अचानक रफ्तार पकड़ ली। इंडोनेशिया द्वारा उत्पादन कटौती के ऐलान के बाद निकल की कीमतें नौ महीने के उच्च स्तर 16,371 डॉलर प्रति टन तक पहुंच
गईं। पूरे साल में निकल करीब 7% चढ़ा, लेकिन हालिया उछाल एक ही दिन में लगभग 3.9% का रहा। स्टेनलेस स्टील और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग में निकल की मजबूत मांग इसकी कीमतों को सहारा दे रही है। शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज पर भी निकल 3.25% बढ़कर 131,610 युआन प्रति टन तक पहुंच गया। 2026 में कीमतों में और तेजी की उम्मीद है, हालांकि ओवर-सप्लाई की चिंता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
चांदी, कॉपर और निकल तीनों ही वैश्विक ग्रीन ट्रांजिशन का अहम हिस्सा बन चुके हैं। इसलिए आने वाले समय में इनकी कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे सप्लाई-डिमांड डायनामिक्स, जियोपॉलिटिकल घटनाओं और सेंट्रल बैंकों की मौद्रिक नीतियों पर नजर रखें। 2026 में चांदी और कॉपर में और तेजी की उम्मीद जताई जा रही है, जबकि निकल में उत्पादन कटौती कीमतों को स्थिर सपोर्ट दे सकती है।
कुल मिलाकर, मेटल मार्केट अब सिर्फ कमोडिटी ट्रेड नहीं रहा, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था का आईना बन चुका है।
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