उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 जैसे-जैसे करीब आ रहा है, नेताओं के बयानों से सियासी माहौल भी गरमाने लगा है। इसी बीच योगी सरकार में मंत्री संजय निषाद के एक बयान ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि बिना लहसुन-प्याज के बनी मछली शाकाहारी होती है।
संजय निषाद के इस बयान की खास चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि फिलहाल सावन का महीना चल रहा है और इस दौरान बड़ी संख्या में हिंदू परिवार मांसाहार से परहेज करते हैं। ऐसे में मंत्री के मछली को शाकाहारी बताए जाने वाले बयान पर सियासी विवाद बढ़ने की संभावना है।
न्यूज चैनल के कार्यक्रम ‘बदलता पूर्वी उत्तर प्रदेश’ में संजय निषाद से खान-पान और निषाद समाज से जुड़े मुद्दों पर सवाल किए गए। इसी दौरान उन्होंने कहा कि बिना लहसुन और प्याज के बनाई गई मछली शाकाहारी है।
उनके इस बयान के दौरान मंच पर मौजूद अन्य लोग शांत रहे, जबकि संजय निषाद मुस्कुराते नजर आए। बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इसको लेकर चर्चा तेज होने लगी है।
संजय निषाद ने अपने बयान को निषाद समाज की पहचान से जोड़ते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार और भारत के संविधान का निशान मछली, तीर और धनुष है। उन्होंने कहा कि ये निषाद समाज का भी प्रतीक है और उन्हें इस पहचान पर गर्व है।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब यूपी में जातीय समीकरण और सामाजिक प्रतिनिधित्व 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में अहम मुद्दा बनते जा रहे हैं।
कार्यक्रम में संजय निषाद ने अपनी लंदन यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने भोजपुरी अभिनेता और गोरखपुर सांसद रवि किशन का जिक्र करते हुए अपने अंदाज में कहा कि रवि किशन ने वहां अपने गानों से लोगों को ‘मस्त’ कर रखा था, जबकि उन्होंने लोगों को ‘पस्त’ कर रखा था।
उन्होंने आगे कहा कि कभी भारत में लंदन की चर्चा होती थी, लेकिन अब लंदन में भारत दिखाई देता है। उन्होंने ब्रिटेन में भारतीय मूल के प्रधानमंत्री बनने का भी जिक्र किया।
संजय निषाद ने कार्यक्रम में निषाद समाज और राजनीतिक समर्थन को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जो लोग निषाद राज के डंडे और झंडे का स्वागत करते हैं, वे उनके भाई हैं, जबकि विरोध करने वालों को उन्होंने ‘कसाई’ कहकर संबोधित किया।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों निषाद समाज के डंडे और झंडे का स्वागत करते हैं।
संजय निषाद ने अपने भाषण के दौरान विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने तुकबंदी वाले अंदाज में निषाद समाज के राजनीतिक समर्थन को सपा, कांग्रेस और बसपा के खिलाफ पेश किया।
उनके इन बयानों के बाद अब राजनीतिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। खासकर मछली को शाकाहारी बताए जाने वाले बयान को लेकर विपक्षी दल और सोशल मीडिया यूजर्स किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं, इस पर नजर रहेगी।
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले नेताओं के बयान लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा बन रहे हैं। संजय निषाद का ताजा बयान भी इसी कड़ी में देखा जा रहा है। एक तरफ उन्होंने मछली और खान-पान को लेकर टिप्पणी की, वहीं दूसरी ओर निषाद समाज की राजनीतिक भूमिका और विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा।
अब देखना होगा कि इस बयान को लेकर विपक्ष इसे कितना बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाता है और संजय निषाद या बीजेपी की ओर से इस पर आगे क्या प्रतिक्रिया आती है।
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