नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के ताज़ा आंकड़ों ने मध्य प्रदेश में कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा की पोल खोल दी है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य महिलाओं, बच्चों और वंचित वर्गों जैसे SC/ST के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामले में देश के सबसे असुरक्षित राज्यों की लिस्ट में नंबर वन पर बना हुआ है।
महिलाओं के लिए ‘खतरनाक’ बना प्रदेश
NCRB के आंकड़ों से पता चलता है कि मध्य प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों और घरेलू हिंसा की दर में कोई कमी नहीं आई है। विशेष रूप से रेप के मामलों में राज्य की स्थिति राष्ट्रीय औसत से काफी खराब है। पुलिस प्रशासन के तमाम दावों और ‘महिला सुरक्षा’ अभियानों के बावजूद, अपराधी बेखौफ नज़र आ रहे हैं।
इतना ही नही बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों ने भी सरकार की चिंता बढ़ा दी है। नाबालिगों के अपहरण और उनके साथ होने वाले यौन शोषण (POCSO) के मामलों में मध्य प्रदेश टॉप 3 राज्यों में शामिल है। स्कूलों और सार्वजनिक जगहों पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर कड़े नियमों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
पिछड़ों पर अत्याचार में मध्य प्रदेश नंबर-1
मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की आबादी काफी ज्यादा है। लेकिन विडंबना यह है कि इनके खिलाफ होने वाले अपराधों में भी राज्य देश में पहले पायदान पर है। आदिवासियों के खिलाफ होने वाली हिंसा और भेदभाव की घटनाओं ने मानवाधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
विपक्ष ने साधा निशाना
इन आंकड़ों के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए कहा है कि “लाड़ली बहना” जैसी योजनाओं के बीच महिलाएं और बच्चे असल में सुरक्षित नहीं हैं। वहीं, जानकारों का मानना है कि केवल कानून बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि पुलिसिंग और न्यायिक प्रक्रिया में तेज़ी लाने की सख्त जरूरत है।