एलपीजी संकट का असर आईटी कंपनियों की कैंटीन पर
नई दिल्ली, 16 मार्च 2026: देश में एलपीजी सप्लाई पर बढ़ते दबाव का असर अब बड़े कॉरपोरेट ऑफिसों तक दिखाई देने लगा है। खासकर आईटी सेक्टर की कई बड़ी कंपनियों ने गैस की खपत कम करने के लिए अपने ऑफिस कैंटीन के मेन्यू में बदलाव शुरू कर दिए हैं। इससे हजारों कर्मचारियों की रोजमर्रा की खाने-पीने की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
जानकारी के मुताबिक Infosys, Tata Consultancy Services (TCS), Cognizant और Wipro जैसी कंपनियों ने अपने कैंटीन मेन्यू को सीमित कर दिया है। पहले जहां नाश्ते और लंच में कई तरह के विकल्प मिलते थे, वहीं अब कंपनियां कम गैस में बनने वाले सरल भोजन पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं।
कई ऑफिस कैंटीन में नाश्ते के मेन्यू से डोसा, ऑमलेट और अन्य गैस-इंटेंसिव आइटम्स को फिलहाल हटा दिया गया है। इनकी जगह अब दाल-चावल, खिचड़ी या हल्के और जल्दी बनने वाले खाने को प्राथमिकता दी जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि पहले कैंटीन में कई तरह के स्नैक्स और ब्रेकफास्ट ऑप्शन मिलते थे, लेकिन अब मेन्यू काफी सीमित हो गया है। कंपनियां इस कदम के जरिए गैस की खपत को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं, क्योंकि बड़े आईटी कैंपस में रोज हजारों लोगों के लिए खाना तैयार किया जाता है।
कुछ कंपनियों ने कर्मचारियों को “Bring Your Own Food” यानी घर से टिफिन लाने की सलाह भी दी है। इसके अलावा कई ऑफिसों में हाइब्रिड वर्क मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि कैंटीन पर पड़ने वाला दबाव कम किया जा सके। कॉरपोरेट सूत्रों का कहना है कि फिलहाल यह व्यवस्था अस्थायी है और गैस सप्लाई की स्थिति सामान्य होने के बाद मेन्यू फिर से पहले जैसा किया जा सकता है। हालांकि अगर एलपीजी संकट लंबे समय तक जारी रहा तो आने वाले दिनों में और भी कंपनियां इसी तरह के कदम उठा सकती हैं।
एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार के कदम
इस बीच सरकार भी एलपीजी सप्लाई को स्थिर रखने के लिए कई कदम उठा रही है। 8 मार्च 2026 को जारी एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर के तहत देश की सभी रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने का निर्देश दिया गया है और प्रोपेन, ब्यूटेन जैसे C3-C4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम को केवल घरेलू कुकिंग गैस के लिए चैनलाइज करने को कहा गया है। इस फैसले के बाद महज पांच दिनों में एलपीजी उत्पादन में करीब 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस से नए एलपीजी कार्गो भी सुरक्षित किए गए हैं, जबकि अमेरिका के साथ हुए समझौते के तहत हर साल करीब 2.2 मिलियन टन एलपीजी आयात किया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि 33 करोड़ से ज्यादा घरेलू उपभोक्ताओं, खासकर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की रसोई में गैस की कमी नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए सिलेंडर डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) का दायरा 50% से बढ़ाकर 90% किया गया है, शहरी क्षेत्रों में नई बुकिंग के बीच 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन का अंतर तय किया गया है तथा ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के अधिकारी लगातार डिस्ट्रीब्यूटर्स की निगरानी कर रहे हैं।
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