उत्तर प्रदेश के संभल से बड़ी खबर सामने आई है। यहां सीजीएम विभांशु विभोर के ट्रांसफर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बुधवार को दर्जनों वकीलों ने कोर्ट परिसर के बाहर प्रदर्शन किया और ट्रांसफर के फैसले पर नाराजगी जताई।
प्रदर्शन के दौरान वकीलों ने ‘सीजीएम साहब को वापस लाओ’ जैसे नारे लगाए और निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की। कुछ समय के लिए कोर्ट परिसर में तनाव का माहौल भी देखने को मिला।
स्थानीय मीडिया के मुताबिक, सीजीएम विभांशु विभोर वही जज हैं जिन्होंने एसपी अनुज चौधरी समेत कई पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। माना जा रहा है कि इसी फैसले के बाद उनका ट्रांसफर किए जाने को लेकर वकीलों में असंतोष है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालात पर नजर रखी जा रही है।
संभल के सीजेएम विभांशु सुधीर के तबादले ने कानूनी और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। यह पूरा विवाद 24 नवंबर 2024 को हुई संभल हिंसा से जुड़ा हुआ है। इस हिंसा के दौरान यामीन नाम के व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि पुलिस फायरिंग में उसके बेटे को तीन गोलियां लगी थीं।
मामले की सुनवाई करते हुए सीजेएम विभांशु सुधीर ने 9 जनवरी 2026 को एएसपी अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। यह आदेश 12 जनवरी को सार्वजनिक हुआ और इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई।
इससे पहले भी सीजेएम विभांशु सुधीर एक फर्जी एनकाउंटर मामले में 13 पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज करने का सख्त आदेश दे चुके हैं। इन आदेशों के बाद पुलिस प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया और एफआईआर दर्ज करने से इनकार करते हुए हाईकोर्ट जाने की बात कही।
नियमों के तहत एफआईआर दर्ज करने की अंतिम समय-सीमा 22 जनवरी थी, लेकिन उससे ठीक पहले 20 जनवरी की रात सीजेएम विभांशु सुधीर का अचानक तबादला कर सुल्तानपुर कर दिया गया। इस तबादले की टाइमिंग को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
वकीलों का आरोप है कि यह तबादला पुलिस के दबाव में किया गया फैसला है, जबकि प्रशासन की ओर से अब तक इस पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं दी गई है। मामले ने अब न्यायिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक हस्तक्षेप को लेकर नई बहस छेड़ दी है।