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सुबह उठते ही घुटने और जोड़ क्यों जाते हैं अकड़? जानिए वजह और रोज की ये आसान आदतें दिला सकती हैं राहत

नई दिल्ली: सुबह बिस्तर से उठते समय अगर घुटनों या दूसरे जोड़ों में अकड़न महसूस होती है तो इसकी वजह रातभर शरीर का कम सक्रिय रहना हो सकती है। कई घंटे एक ही स्थिति में आराम करने के दौरान जोड़ों और आसपास के ऊतकों में हलचल कम हो जाती है। इसका असर सुबह उठने के बाद शुरुआती कदमों में महसूस हो सकता है। आमतौर पर कुछ देर चलने-फिरने के बाद यह अकड़न कम होने लगती है। हालांकि, अगर अकड़न लंबे समय तक बनी रहे और इसके साथ दर्द, सूजन या गर्माहट भी हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

रातभर आराम के बाद सुबह क्यों अकड़ जाते हैं जोड़?

रात में कई घंटे शरीर की गतिविधि कम रहने के कारण जोड़ों और उनके आसपास के ऊतकों में रक्त संचार और हलचल कम हो सकती है। इसी वजह से सुबह उठने पर घुटने और दूसरे जोड़ कुछ समय के लिए जकड़े हुए महसूस हो सकते हैं।

जोड़ों में मौजूद सिनोवियल फ्लूड उनकी सामान्य गतिविधि में मदद करता है। लंबे समय तक कम हलचल रहने के बाद जब व्यक्ति सुबह चलना-फिरना शुरू करता है तो जोड़ों की गतिविधि बढ़ती है और अकड़न धीरे-धीरे कम हो सकती है।

कब सामान्य अकड़न नहीं माननी चाहिए?

अगर सुबह होने वाली अकड़न कुछ मिनटों तक रहती है और थोड़ी देर चलने-फिरने के बाद ठीक हो जाती है तो आमतौर पर ज्यादा चिंता की बात नहीं होती। लेकिन अगर यह समस्या लगातार बनी रहती है या रोजाना लंबे समय तक महसूस होती है तो इसके कारण पर ध्यान देना जरूरी है।

खास तौर पर अगर अकड़न करीब एक घंटे या उससे ज्यादा समय तक बनी रहती है और इसके साथ जोड़ों में दर्द, सूजन या गर्माहट भी मौजूद हो तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। ऐसे लक्षण किसी अंदरूनी समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं।

अकड़न कितनी देर रहती है, इस पर भी दें ध्यान

जोड़ों की समस्या को समझने के लिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि अकड़न कितनी ज्यादा है। यह भी देखना जरूरी है कि समस्या कितनी बार होती है, कितनी देर तक रहती है और चलने-फिरने के बाद उसमें कितना सुधार आता है।

अगर अकड़न लगातार बढ़ रही है या उसके साथ दूसरे लक्षण भी जुड़ रहे हैं तो डॉक्टर को इसकी पूरी जानकारी देना जांच और सही सलाह के लिए उपयोगी हो सकता है।

सुबह उठते ही हल्की एक्सरसाइज से करें शुरुआत

बिस्तर से उठते ही अचानक तेज गतिविधि शुरू करने के बजाय शरीर को धीरे-धीरे सक्रिय करना बेहतर हो सकता है। हाथ-पैरों को हल्के से हिलाना, घुटनों को धीरे-धीरे मोड़ना और सीधा करना जैसे आसान मूवमेंट किए जा सकते हैं।

इसके बाद धीरे-धीरे चलना शुरू करें। नियमित हल्की गतिविधि जोड़ों को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है।

दिन की शुरुआत पानी से करना रखें आदत

सुबह उठने के बाद पर्याप्त पानी पीना शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। शरीर के सामान्य कामकाज के लिए पर्याप्त पानी जरूरी है। इसलिए दिन की शुरुआत एक गिलास पानी से करना एक अच्छी आदत हो सकती है।

हालांकि, केवल पानी पीने को जोड़ों की अकड़न का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। अगर समस्या लगातार बनी हुई है तो इसके वास्तविक कारण की जांच जरूरी है।

खान-पान में इन चीजों को दें जगह

जोड़ों और पूरे शरीर की सेहत के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार जरूरी है। खाने में फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, नट्स और अच्छे फैट वाले खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं।

वहीं, बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड और अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन कम रखना बेहतर माना जाता है। लंबे समय तक स्वस्थ खान-पान की आदतें शरीर की सामान्य सेहत के लिए फायदेमंद होती हैं।

गर्माहट से भी मिल सकता है आराम

सुबह गुनगुने पानी से नहाने या प्रभावित जोड़ पर हल्की गर्म सिकाई करने से कुछ लोगों को अकड़न और असहजता में राहत महसूस हो सकती है। गर्माहट से स्थानीय रक्त संचार बढ़ने में भी मदद मिल सकती है।

अगर किसी जोड़ में पहले से ज्यादा सूजन, लालिमा या गर्माहट है तो बिना सलाह के गर्म सिकाई करने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लेना बेहतर है।

रोज थोड़ा सक्रिय रहना ज्यादा जरूरी

जोड़ों की सेहत के लिए कभी-कभार बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करने के बजाय नियमित रूप से हल्की गतिविधि करना ज्यादा उपयोगी हो सकता है। रोजाना वॉक, हल्की स्ट्रेचिंग और अपनी क्षमता के अनुसार शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है।

अगर सुबह की अकड़न लगातार बढ़ रही है, एक घंटे से ज्यादा रहती है या दर्द और सूजन के साथ होती है तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

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