मॉब जस्टिस का खौफनाक चेहरा
केरल : केरल के पालक्कड़ जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ छत्तीसगढ़ के 31 वर्षीय दलित प्रवासी मजदूर रामनारायण बघेल की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। आरोप है कि स्थानीय लोगों ने उन्हें बांग्लादेशी घुसपैठिया समझ लिया और 17 दिसंबर 2025 को वालायर क्षेत्र के अट्टापल्लम में बेरहमी से हमला किया। गंभीर रूप से घायल रामनारायण की अस्पताल में मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर 80 से अधिक चोटों के निशान मिलने से घटना की क्रूरता उजागर हुई है।
“क्या तुम बांग्लादेशी हो?”—सवाल के बाद शुरू हुई हिंसा
रामनारायण रोजगार की तलाश में महज एक सप्ताह पहले ही केरल पहुँचे थे। वायरल वीडियो में हमलावरों को उनसे आक्रामक लहजे में पूछते सुना जा सकता है, “क्या तुम बांग्लादेशी हो?” इसके बाद उन्हें थप्पड़ों, लात-घूंसों से पीटा गया। मारपीट के दौरान रामनारायण खून की उल्टियाँ करने लगे और बेहोश हो गए, लेकिन उन्हें समय पर अस्पताल नहीं ले जाया गया। बाद में पुलिस द्वारा पालक्कड़ जिला अस्पताल पहुँचाए जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
गिरफ्तारियाँ, एसआईटी और मुआवजे का ऐलान
पुलिस ने अब तक इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि कुछ अन्य फरार बताए जा रहे हैं। गिरफ्तार आरोपियों में कुछ के आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए केरल सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है, जिसका नेतृत्व पालक्कड़ जिला पुलिस प्रमुख कर रहे हैं। मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं।
सरकार की ओर से पीड़ित परिवार को कम से कम 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आश्वासन दिया गया है, जिस पर कैबिनेट में निर्णय होगा। वहीं, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने घटना को अमानवीय बताते हुए परिवार को 5 लाख रुपये की सहायता की घोषणा की है। रामनारायण का पार्थिव शरीर 23 दिसंबर को हवाई मार्ग से रायपुर लाया गया और उनके पैतृक गांव करही (सक्ती जिला) में पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
परिवार की मांग और राजनीतिक बहस
रामनारायण की पत्नी ललिता और दो छोटे बच्चों सहित परिवार ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है। परिजनों ने शुरुआती तौर पर मुआवजे को लेकर शव लेने से इनकार किया था, लेकिन बाद में प्रशासन से बातचीत के बाद सहमति बनी। एक रिश्तेदार ने कहा, “वह सिर्फ परिवार का पेट पालने के लिए केरल गए थे। इस नफरत ने हमारा सब कुछ छीन लिया।”
यह घटना सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी बहस का विषय बन गई है। कुछ लोग इसे अवैध प्रवासन से जोड़ रहे हैं, जबकि आलोचक इसे नफरत आधारित सतर्कता और मॉब जस्टिस का खतरनाक उदाहरण बता रहे हैं। विपक्ष ने केरल की वाम मोर्चा सरकार पर साम्प्रदायिक तनाव रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है, वहीं राष्ट्रीय स्तर पर भी नफरत अपराधों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग तेज हुई है।
जांच अभी जारी है। नागरिक समाज संगठनों ने ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों की जरूरत पर जोर दिया है। केरल पुलिस ने जनता से अपील की है कि किसी भी संदेह की स्थिति में कानून अपने हाथ में न लें और आधिकारिक चैनलों के माध्यम से शिकायत दर्ज कराएं। यह मामला प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और उनके खिलाफ भेदभाव की गंभीर कमजोरी को रेखांकित करता है, जबकि यही वर्ग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।
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