त्रिवेंद्रम, 10 अप्रैल 2026: केरल विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार वोटिंग ने नया जोश दिखाया। 9 अप्रैल को 140 सीटों पर हुए मतदान में कुल 78.27% वोटिंग दर्ज की गई, जो 2021 के मुकाबले काफी ज्यादा मानी जा रही है। बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत साफ संकेत दे रहा है कि इस बार जनता राज्य की राजनीति को लेकर बेहद गंभीर है और तीनों मोर्चों— एलडीएफ, यूडीएफ और एनडीए— के बीच मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है।
राज्य के कई जिलों में सुबह से ही वोटिंग को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। कोझीकोड में सबसे ज्यादा 81.35% मतदान दर्ज हुआ, जबकि पलक्कड़ भी 80% के पार रहा। दूसरी ओर पठानमथिट्टा में सबसे कम 70.76% वोटिंग हुई। खास बात यह रही कि महिलाओं और युवा मतदाताओं ने इस बार बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे कई सीटों पर समीकरण बदलने की चर्चा तेज हो गई है। शाम 6 बजे मतदान खत्म होने के बाद भी कई बूथों पर लंबी कतारें रहीं और टोकन देकर लोगों को वोट डालने का मौका दिया गया।
तीनों मोर्चों के बीच कांटे की टक्कर
इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा तीन मोर्चों की सीधी लड़ाई को लेकर है। एलडीएफ जहां मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने की कोशिश कर रहा है, वहीं कांग्रेस-नीत यूडीएफ सत्ता वापसी के लिए पूरा जोर लगाए हुए है। दूसरी तरफ भाजपा-एनडीए ने इस बार 98 सीटों पर उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को और रोचक बना दिया है।
भाजपा के केरल प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने इसे राज्य का आखिरी “तीन मोर्चों वाला चुनाव” तक बता दिया। उनका कहना है कि 2026 के बाद केरल की राजनीति दो बड़े ध्रुवों में सिमट सकती है। यह बयान चुनावी माहौल को और गर्म कर गया है।
नेमोम से लेकर तिरुवनंतपुरम तक हाई-वोल्टेज सीटें
इस बार कई सीटें हाई-प्रोफाइल बनी हुई हैं। खासतौर पर नेमोम सीट सबसे ज्यादा चर्चा में है, जहां राजीव चंद्रशेखर का मुकाबला एलडीएफ के वी. शिवांकुट्टी और यूडीएफ के के.एस. सबरीनाथन से है। इसे चुनाव का सबसे बड़ा त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा है।
इसके अलावा पलक्कड़, तिरुवनंतपुरम और कुछ शहरी सीटों पर भी तीनों मोर्चों के बीच कड़ी टक्कर बताई जा रही है। कई बड़े नेताओं और फिल्म सितारों— जैसे शशि थरूर, ममूट्टी और मोहनलाल— ने भी वोट डालकर चुनाव को हाई-प्रोफाइल बना दिया।
नतीजों पर टिकी सबकी नजर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार ज्यादा मतदान और त्रिकोणीय मुकाबले की वजह से नतीजे पूरी तरह अनिश्चित हो गए हैं। एलडीएफ तीसरा कार्यकाल चाहता है, यूडीएफ सत्ता में वापसी का सपना देख रहा है, जबकि एनडीए कुछ अहम सीटों पर बड़ी सेंध लगाने की उम्मीद में है।
करीब 2.71 करोड़ मतदाताओं वाले इस चुनाव में बहुमत के लिए 71 सीटें जरूरी हैं। अब सभी की नजर 4 मई 2026 की मतगणना पर है, जो तय करेगी कि केरल में सत्ता किसके हाथ जाती है और क्या सच में राज्य की राजनीति नई दिशा लेने जा रही है।