कानपुर: एक तरफ देश का युवा अपने सुनहरे भविष्य के लिए दिन-रात संघर्ष कर रहा है, कड़ी मेहनत और परीक्षाओं के दौर से गुजर रहा है, वहीं दूसरी ओर
कानपुर में ‘डिग्री’ का एक ऐसा काला बाजार फल-फूल रहा था जिसने पूरे शिक्षा तंत्र की जड़ों को हिलाकर रख दिया है। कानपुर पुलिस ने एक ऐसे संगठित सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जो बिना परीक्षा दिए डिग्रियां और बिना पढ़े मार्कशीट बांट रहा था।
मैथ्स टीचर का ‘खतरनाक’ गणित
इस पूरे काले साम्राज्य का मास्टरमाइंड कोई अपराधी नहीं, बल्कि पेशे से एक मैथ्स टीचर ‘शैलेंद्र’ है। शैलेंद्र ने इस धंधे की शुरुआत एक मामूली एडमिशन एजेंट के तौर पर की थी, लेकिन धीरे-धीरे उसने अपना जाल 9 राज्यों की 14 यूनिवर्सिटीज तक फैला लिया।
जब पुलिस ने छापेमारी की, तो बरामदगी देखकर अधिकारियों के भी होश उड़ गए। पुलिस ने 900 से ज्यादा फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां बरामद की। इसमें बीटेक, बी-फार्मा और एलएलबी जैसे प्रोफेशनल कोर्सेज की डिग्रियां शामिल थीं। इस गिरोह का दावा इतना पुख्ता था कि आप सिर्फ कोर्स का नाम बताइए और डिग्री सीधे आपके घर पहुंच जाती थी।
60:40 का खौफनाक फॉर्मूला
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह किसी हाई-प्रोफाइल कॉर्पोरेट कंपनी की तरह काम करता था। इनका मुनाफा बांटने का गणित बेहद सटीक था— ’60:40 का फॉर्मूला’। फर्जी डिग्री से होने वाली कुल कमाई का 40% हिस्सा एजेंट के पास रहता था, जबकि बड़ा हिस्सा यानी 60% सीधे यूनिवर्सिटी के क्लर्कों और अंदरूनी कर्मचारियों की जेब में जाता था। इसी मोटी रकम के दम पर यूनिवर्सिटी के आधिकारिक डेटा और फाइलों में हेरफेर की जाती थी, ताकि डिग्री जांच में भी ‘असली’ नजर आए।
SIT का गठन: अब रडार पर ‘सफेदपोश’
मामले की गंभीरता को देखते हुए कानपुर नगर पुलिस आयुक्त के निर्देश पर 14 सदस्यीय एसआईटी (SIT) का गठन किया गया है। एडिशनल डीसीपी कानपुर दक्षिण के नेतृत्व में यह विशेष टीम अब उन 14 यूनिवर्सिटीज के रिकॉर्ड खंगालेगी जिनके नाम जांच में सामने आए हैं।
इस मामले पर विपिन ताड़ा (सहायक पुलिस आयुक्त, कानपुर नगर) का कहना है कि, “कुछ अभियुक्तों को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में उपकरण बरामद किए गए हैं। पुलिस हर पहलू पर बारीकी से जांच कर रही है ।
मेहनती छात्रों के सपनों पर डाका
यह मामला सिर्फ कागजों के हेरफेर का नहीं है, बल्कि उन लाखों मेहनती छात्रों के सपनों पर सीधा हमला है जो अपनी योग्यता के दम पर आगे बढ़ना चाहते हैं। अब निगाहें एसआईटी की कार्रवाई पर टिकी हैं।