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Israel Election: बहुमत से दूर नेतन्याहू, सत्ता बचाने के लिए आइजनकोट के साथ गठबंधन का विकल्प खुला

तेल अवीव। इजरायल के संसदीय चुनाव में किसी भी राजनीतिक गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के बाद सरकार गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है।

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने सत्ता बचाने की चुनौती है, वहीं विपक्षी नेता गादी आइजनकोट भी सरकार बनाने की कोशिश में जुटे हैं। चुनावी नतीजों ने ऐसा राजनीतिक समीकरण बना दिया है, जिसमें अरब पार्टियों के 19 सांसदों की भूमिका बेहद अहम हो गई है।

इसी बीच नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय एकता सरकार के विचार को खारिज करने के बावजूद आइजनकोट के साथ गठबंधन और प्रधानमंत्री पद साझा करने की संभावना को पूरी तरह बंद नहीं किया है। इजरायली मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बंद कमरे में हुई बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने कहा कि सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, अभी दोनों नेताओं के बीच किसी गठबंधन का औपचारिक प्रस्ताव सामने नहीं आया है।

120 सीटों वाली संसद में बहुमत का आंकड़ा 61

इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को हुए संसदीय चुनाव के नतीजों ने किसी भी गठबंधन को सरकार बनाने की आसान राह नहीं दी है। 120 सदस्यों वाली नेसेट में बहुमत के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है।

चुनाव के नतीजों के मुताबिक सीटों का गणित कुछ इस तरह है:

  • नेतन्याहू का गठबंधन: 53 सीटें
  • गादी आइजनकोट का विपक्षी गठबंधन: 48 सीटें
  • अरब नेतृत्व वाली पार्टियां: 19 सीटें

इस आंकड़े से साफ है कि नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत से 8 सीटें पीछे है, जबकि आइजनकोट के खेमे को बहुमत के लिए 13 अतिरिक्त सांसदों की जरूरत होगी। ऐसे में दोनों खेमों के लिए नए राजनीतिक सहयोगियों की तलाश जरूरी हो गई है।

अरब पार्टियों ने बनाया रिकॉर्ड, 19 सीटों के साथ बढ़ी ताकत

इस चुनाव का सबसे अहम पहलू अरब नेतृत्व वाली पार्टियों का प्रदर्शन रहा है। जॉइंट लिस्ट ने 11 सीटें हासिल कीं, जबकि रआम को 8 सीटें मिलीं। दोनों के पास मिलाकर 19 सांसद हो गए हैं।

यह इजरायल की संसद में अरब पार्टियों का अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है। 2022 के चुनाव में इन दोनों पार्टियों के पास कुल 10 सीटें थीं। इस बार उनकी संख्या लगभग दोगुनी हो गई है।

राजनीतिक रूप से इसका महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि आइजनकोट का विपक्षी गठबंधन और दोनों अरब पार्टियां मिलकर 67 सांसदों का समर्थन जुटा सकते हैं। यानी संख्या के लिहाज से नेतन्याहू को सत्ता से बाहर रखने का रास्ता मौजूद है।

क्या अरब पार्टियों के समर्थन से बन सकती है आइजनकोट की सरकार?

आइजनकोट के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने सहयोगी दलों को अरब पार्टियों के समर्थन के लिए तैयार करना है। उनके गठबंधन के कुछ नेताओं ने चुनाव से पहले ही अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने का विरोध किया था।

आइजनकोट ने भी सरकार में शामिल होने वाले सांसदों के लिए कुछ शर्तें रखी हैं। इनमें इजरायल को यहूदी और लोकतांत्रिक देश के रूप में स्वीकार करना, सभी नागरिकों के लिए सैन्य या राष्ट्रीय सेवा का समर्थन करना और हमास को आतंकवादी संगठन मानते हुए गाजा में उसकी सैन्य तथा शासन क्षमता खत्म करने का समर्थन करना शामिल है।

अरब पार्टियों के समर्थन को लेकर एक विकल्प यह भी है कि वे सरकार में शामिल हुए बिना बाहर से समर्थन दें। हालांकि, इस रास्ते पर भी विपक्षी गठबंधन के भीतर राजनीतिक मतभेद और सरकार की स्थिरता को लेकर सवाल बने हुए हैं।

नेतन्याहू को क्यों सता रहा है गठबंधन टूटने का डर?

इजरायली मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नेतन्याहू को आशंका है कि आइजनकोट अरब पार्टियों और अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदी दलों के कुछ सांसदों का समर्थन जुटाकर उनके खिलाफ सरकार बना सकते हैं।

ऐसी स्थिति में नेतन्याहू को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है। यही वजह है कि उनके खेमे में विपक्षी गठबंधन की संभावनाओं को लेकर चिंता बढ़ी हुई है।

दूसरी तरफ, नेतन्याहू और आइजनकोट के बीच एकता सरकार या प्रधानमंत्री पद के रोटेशन की संभावना भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बनी हुई है। हालांकि, आइजनकोट पहले नेतन्याहू के साथ सत्ता साझा करने से इनकार कर चुके हैं। इसलिए इस विकल्प को फिलहाल आसान नहीं माना जा रहा है।

क्या इजरायल में फिर होंगे चुनाव?

अगर कोई भी नेता 61 सांसदों का समर्थन जुटाने में सफल नहीं होता है तो इजरायल में राजनीतिक गतिरोध और गहरा सकता है। राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग की भूमिका भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण होगी। वह राजनीतिक दलों से बातचीत के बाद उस उम्मीदवार को सरकार बनाने का अवसर दे सकते हैं, जिसके पास बहुमत जुटाने की सबसे बेहतर संभावना हो।

यदि सरकार बनाने की कोशिशें नाकाम रहती हैं तो देश को एक बार फिर मध्यावधि चुनाव की ओर जाना पड़ सकता है।

फिलहाल इजरायल की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 19 अरब सांसदों का समर्थन किसे मिलेगा और क्या नेतन्याहू अपनी सत्ता बचा पाएंगे या आइजनकोट नया राजनीतिक समीकरण बनाकर प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचेंगे।

news desk

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