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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: SIT की चार्जशीट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने निपटाईं याचिकाएं , अब निचली अदालत में होगा फैसला

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम और दान से जुड़े कथित चोरी और गबन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाओं का निपटारा कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के आरोपों की सच्चाई और गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही अयोध्या की निचली अदालत में होगी। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले से जुड़े तथ्यों को रखा। वहीं, विशेष जांच दल (SIT) इस मामले में पहले ही अयोध्या की निचली अदालत में चार्जशीट दाखिल कर चुका है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी संज्ञान लिया है।

एसआईटी चार्जशीट में बड़ा खुलासा

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी और गबन मामले में अहम जानकारी दी। एसआईटी की जांच के मुताबिक, मंदिर में दान और चढ़ावे की रकम की गिनती के दौरान कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर कथित तौर पर पैसे अपने पास रखने के आरोप हैं।

सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि कथित तौर पर इन पैसों को बैंक खातों में जमा किया जाता था या अलग-अलग जगहों पर निवेश किया जाता था। एसआईटी जांच पूरी कर अयोध्या की निचली अदालत में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: याचिकाकर्ताओं को मिली यह छूट

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी तमाम याचिकाओं का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ताओं और शिकायतकर्ताओं को बड़ी राहत दी है:

निचली अदालत में मदद की अनुमति: अदालत ने याचिकाकर्ताओं को यह छूट दी है कि वे मुकदमे की सुनवाई के दौरान स्थानीय अदालत में शिकायतकर्ता के तौर पर अपनी बात रख सकते हैं और कानूनी कार्यवाही में पूरी सहायता कर सकते हैं।

गुण-दोष पर टिप्पणी से इनकार: सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि उसने आरोपों की सच्चाई या गुण-दोष पर कोई भी राय नहीं बनाई है। यानी आरोप सही हैं या गलत, इसका फैसला अब निचली अदालत में होने वाले ट्रायल के दौरान ही तय होगा।

राम मंदिर की जमीन से जुड़ी नई याचिका खारिज

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य नई याचिका पर सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया। इस याचिका में यह मांग उठाई गई थी कि अदालत यह तय करे कि मौजूदा राम मंदिर उसी जमीन पर बना है या नहीं, जिस पर मुख्य अयोध्या भूमि विवाद का ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस अतिरिक्त मांग को खारिज करते हुए मामले को मुख्य प्रकरण तक ही सीमित रखा।

news desk

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