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ट्रंप की ‘मिस्ट्री डिप्लोमेसी’ से कहीं फूट डालने की तैयारी तो नहीं! क्यों ईरान के गालिबफ का नाम चर्चा में ?

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनकी टीम ईरान के किसी “उच्चस्तरीय और सम्मानित” नेता के साथ “सकारात्मक और उत्पादक” बातचीत कर रही है। ट्रंप का कहना है कि ये बातचीत युद्ध को रोकने, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने और मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए की जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई से कोई संपर्क नहीं हुआ है और उनकी स्थिति फिलहाल अनिश्चित है।

ट्रंप किससे कर रहे हैं बातचीत?

हालांकि ट्रंप ने नाम नहीं बताया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सूत्र अब बार-बार ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद-बाकर गालिबफ का नाम ले रहे हैं। गालिबफ IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) की एयरोस्पेस फोर्स के पूर्व कमांडर रह चुके हैं। इसके अलावा वे पुलिस प्रमुख और तेहरान के मेयर भी रह चुके हैं।

उनकी सैन्य और राजनीतिक पृष्ठभूमि उन्हें ईरान की पावर सर्किल में मजबूत स्थान देती है। व्हाइट हाउस उन्हें न सिर्फ बातचीत के लिए सही पार्टनर मान रहा है, बल्कि कुछ रिपोर्ट्स में उन्हें ट्रंप प्रशासन का भविष्य का संभावित नेता या “हॉट ऑप्शन” भी बताया जा रहा है।

ट्रंप का इशारा: IRGC में दरार की रणनीति?

ट्रंप ने कहा कि यह “टॉप पर्सन” सुप्रीम लीडर नहीं हैं। इसी कारण इजरायली मीडिया और रॉयटर्स जैसी एजेंसियां गालिबफ को अमेरिका की बैकचैनल शांति कोशिशों का मुख्य सूत्र बता रही हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप का यह बयान और गालिबफ जैसे IRGC बैकग्राउंड वाले नेता को सामने लाना संकेत है कि अमेरिका ईरान के अंदरूनी पावर स्ट्रक्चर में दरार डालने की कोशिश कर रहा है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण तेल की कीमतें पहले ही बढ़ रही हैं, और ट्रंप ने हमले की डेडलाइन बढ़ा दी है।

क्या ये सिर्फ बाज़ार को शांत करने की रणनीति है?

हालांकि ईरान अभी एकजुटता का दावा कर रहा है, लेकिन अगर गालिबफ या कोई अन्य IRGC से जुड़ा नेता अमेरिका की बातचीत में शामिल दिखता है, तो तेहरान के अंदर राजनीतिक हलचल बढ़ सकती है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या यह सिर्फ नैरेटिव है या वास्तविक बैकचैनल डिप्लोमेसी काम कर रही है।

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