अमेरिका और इज़रायल के दावों के बाद अब ईरान की सेना की प्रमुख इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC), सरकारी समाचार एजेंसी Islamic Republic News Agency (IRNA) और आधिकारिक चैनल Press TV ने सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei के निधन की पुष्टि कर दी है।
बताया गया है कि शनिवार को हुए संयुक्त हवाई हमलों के समय खामेनेई अपने कार्यालय में मौजूद थे। IRGC ने अपने बयान में इसे “सम्मानित शहादत” करार देते हुए शोक व्यक्त किया और कहा कि उनका मार्ग आगे भी जारी रहेगा।
संगठन ने अमेरिका और “ज़ायोनी शासन” को हमले के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कड़ी कार्रवाई और जवाबी कदम उठाने की चेतावनी दी है। साथ ही, देशवासियों से राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की अपील की गई है।
इससे पहले प्रेस टीवी ने कहा था कि इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता अमेरिका और इज़रायल के संयुक्त हमलों में मारे गए। खामेनेई के निधन के बाद ईरान में एक सप्ताह का सार्वजनिक अवकाश और 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है।
कौन थे खामेनेई?
86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई ने 1989 में Ruhollah Khomeini के निधन के बाद देश की बागडोर संभाली थी। उनके नेतृत्व में ईरान ने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाया, जिससे अमेरिका और इज़रायल के साथ तनाव बढ़ा। 2015 के परमाणु समझौते के बावजूद, बाद में अमेरिका के हटने के बाद संबंध और बिगड़े तथा ईरान ने उच्च स्तर तक यूरेनियम संवर्धन जारी रखा।
खामेनेई ने रिवोल्यूशनरी गार्ड और क्षेत्रीय सहयोगी गुटों को मजबूत किया। ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ रणनीति के तहत ईरान ने Hezbollah और Hamas जैसे संगठनों का समर्थन किया। हालांकि, 2023 के बाद पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्षों ने ईरान के कई सहयोगियों को कमजोर किया।
घरेलू मोर्चे पर आर्थिक संकट और सख्त नीतियों के कारण बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। 2022 में Mahsa Amini की मौत के बाद भड़के आंदोलन को भी कड़े दमन का सामना करना पड़ा।
खामेनेई के निधन के बाद इस्लामी गणराज्य के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। 88 सदस्यीय असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स नए सर्वोच्च नेता का चयन करेगी, लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट उत्तराधिकारी सामने नहीं आया है। आने वाले समय में सत्ता संतुलन तय करने में रिवोल्यूशनरी गार्ड की भूमिका अहम मानी जा रही है।