फोटडो क्रेडिट- CENTCOM.
वाशिंगटन/दुबई। मध्य पूर्व के समुद्र में तनाव की लहरें अब सुनामी का रूप ले रही हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के खिलाफ अपनी समुद्री नाकेबंदी को और अधिक सख्त कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 31 व्यापारिक जहाजों को अपना रास्ता बदलने या वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा है। 13 अप्रैल से शुरू हुई इस सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक व्यापार जगत की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
अमेरिका ने इस नाकेबंदी को महज एक चेतावनी तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि समुद्र में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इस ऑपरेशन की भयावहता का अंदाजा इन आंकड़ों से लगाया जा सकता है:
दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर इस नाकेबंदी का सबसे गहरा असर दिख रहा है। CENTCOM के कड़े रुख के कारण ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले या वहां से निकलने वाले किसी भी जहाज को अनुमति नहीं दी जा रही है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि 30 जून तक हालात सामान्य होने की संभावना न के बराबर है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों और ट्रेडिंग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह केवल समुद्री रास्ता रोकना नहीं है, बल्कि ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ने की एक सोची-समझी रणनीति है। हालांकि पर्दे के पीछे सीजफायर और बातचीत की खबरें आती रही हैं, लेकिन पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के हालिया बयानों और वर्तमान सैन्य सक्रियता ने साफ कर दिया है कि अमेरिका फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं है।
“जब तक कोई ठोस कूटनीतिक समझौता नहीं हो जाता, अमेरिकी नौसेना की यह ‘आयरन फिस्ट’ पॉलिसी जारी रहेगी।”
फिलहाल निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की निगाहें वाशिंगटन और तेहरान के बीच होने वाली किसी भी संभावित हलचल पर टिकी हैं। लेकिन समुद्र में तैनात 17 युद्धपोत और आसमान में मंडराते अमेरिकी फाइटर जेट्स इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि होर्मुज में शांति की वापसी फिलहाल दूर की कौड़ी है।
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