ईरान में लगातार अमेरिका की बमबारी जारी है और हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। कई शहरों में भारी नुकसान की खबरें सामने आ रही हैं। इसके बावजूद ईरान भी जवाबी कार्रवाई कर रहा है।
इस जंग का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है। शेयर बाजार पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा है और लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। होली 2026 के मौके पर भी बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
बुधवार, 4 मार्च को बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली शुरू हो गई। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव ने ग्लोबल इकोनॉमी को झकझोर कर रख दिया है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
शेयर बाजार से मिली जानकारी के अनुसार, आज के कारोबार में NIFTY 50 और BSE Sensex में तेज गिरावट दर्ज की गई। कुछ ही मिनटों में निवेशकों के लगभग 8 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए।
2% से ज्यादा टूटे सेंसेक्स और निफ्टी 50
बुधवार, 4 मार्च 2026 को शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। BSE Sensex 1,710 अंकों यानी 2% से अधिक की गिरावट के साथ 78,529 के स्तर पर आ गया। यह पिछले साल अप्रैल के बाद का सबसे निचला स्तर है।
वहीं NIFTY 50 भी 477 अंक या 2% से ज्यादा टूटकर 24,389 पर कारोबार करता नजर आया। पिछले सात महीनों में यह पहला मौका है जब निफ्टी 24,400 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसला है।
क्यों कमजोर हुआ निवेशकों का सेंटीमेंट?
Geojit Investments Limited के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट डॉ. वी.के. विजय कुमार ने कहा कि युद्ध के तेज होने और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल के कारण बाजार बड़े अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर चुका है।
उनके मुताबिक, यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि यह संघर्ष कितने समय तक चलेगा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका कितना गहरा असर पड़ेगा। भारत के लिए स्थिति और संवेदनशील है, क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है।
यदि तनाव लंबा खिंचता है, तो व्यापार घाटा बढ़ सकता है, रुपये में और कमजोरी आ सकती है तथा कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बन सकता है। हालांकि, अगर अगले 3-4 सप्ताह में हालात सामान्य हो जाते हैं, तो बाजार भी स्थिर हो सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
अमेरिका-ईरान तनाव के चलते Strait of Hormuz में समुद्री यातायात प्रभावित हुआ है। इस मार्ग से दुनिया की करीब 20% तेल आपूर्ति गुजरती है।
इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत 82 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। वैश्विक बैंक Barclays ने चेतावनी दी है कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है।
डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर
वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारतीय रुपया भी दबाव में है। डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 92.05 के अपने अब तक के निचले स्तर पर पहुंच गया। कमजोर रुपया आयात को महंगा बनाता है, जिससे महंगाई का खतरा और बढ़ जाता है।
निवेशकों के लिए क्या सलाह?
विशेषज्ञों का कहना है कि अनिश्चितता के दौर में घबराकर बाजार से बाहर निकलना अक्सर गलत फैसला साबित होता है। इतिहास गवाह है कि बाजार में गिरावट के बाद रिकवरी की क्षमता रहती है।
लंबी अवधि का नजरिया रखने वाले और जोखिम उठाने की क्षमता रखने वाले निवेशक इस गिरावट को अवसर के रूप में देख सकते हैं। बैंकिंग, फार्मा, ऑटोमोबाइल और डिफेंस जैसे सेक्टरों के मजबूत शेयरों में चरणबद्ध तरीके से निवेश भविष्य में लाभकारी साबित हो सकता है।