ईरान से भारतीयों की सुरक्षित वापसी
नई दिल्ली, 17 जनवरी 2026 – ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों, इंटरनेट ब्लैकआउट और सुरक्षा चिंताओं के बीच ईरान से भारतीय नागरिकों को लेकर पहली दो कमर्शियल उड़ानें दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रात में सुरक्षित उतरीं। ये उड़ानें 16 जनवरी की देर रात पहुंचीं, जिसमें छात्र, तीर्थयात्री और कामगार शामिल थे। वापस लौटे भारतीयों ने “नो इंटरनेट, खतरनाक विरोध” का जिक्र करते हुए भारतीय सरकार और दूतावास की मदद की सराहना की।
क्या है पूरा मामला?
ईरान में दिसंबर 2025 के अंत से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, जो आर्थिक संकट (रियाल की कीमत गिरना, महंगाई, बेरोजगारी) से शुरू होकर अब शासन-विरोधी मांगों में बदल गए हैं। प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की कथित कार्रवाई में हजारों मौतें हुईं (मानवाधिकार संगठनों के अनुसार 3,000 से अधिक, कुछ रिपोर्ट्स में 12,000 तक)।
8 जनवरी 2026 से ईरान में लगभग पूर्ण इंटरनेट ब्लैकआउट लगा दिया गया, जिससे संचार पूरी तरह ठप हो गया। लोग परिवारों से संपर्क नहीं कर पा रहे थे, और प्रदर्शनकारियों को संगठित होने से रोका गया। ईरानी हवाई क्षेत्र कुछ समय के लिए बंद रहा, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हुईं। बाद में खुलने के बाद कमर्शियल उड़ानें बहाल हुईं।
दिल्ली पहुंचे भारतीयों के अनुभव
एक इंजीनियर ने बताया: “तेहरान में स्थिति अब सामान्य है, लेकिन इंटरनेट नहीं था। प्रदर्शन खतरनाक थे – सड़कों पर आग लगी हुई थी।”
जम्मू-कश्मीर के एक नागरिक ने कहा: “प्रदर्शनकारियों ने कारों के आगे आकर परेशान किया। इंटरनेट न होने से परिवार को सूचना नहीं दे पाए। सरकार ने बहुत अच्छा प्रयास किया, छात्रों को सुरक्षित वापस लाया।”
शिराज यूनिवर्सिटी में MBBS पढ़ रही एक छात्रा ने कहा: “प्रदर्शन की खबरें सुनीं, लेकिन खुद नहीं देखा। इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद थीं।”
भारत सरकार की भूमिका
विदेश मंत्रालय (MEA) ने ईरान में भारतीयों (लगभग 9,000) की सुरक्षा के लिए कई एडवाइजरी जारी कीं।
दूतावास ने छात्रों, तीर्थयात्रियों और अन्य नागरिकों से संपर्क बनाए रखा, और सुरक्षित वापसी के लिए सहायता प्रदान की। MEA ने ईरान यात्रा न करने की सलाह दोहराई और वहां मौजूद लोगों से सतर्क रहने, प्रदर्शन स्थलों से दूर रहने को कहा। जम्मू-कश्मीर छात्र संघ ने भी छात्रों की वापसी के लिए विशेष उड़ानों की मांग की थी, और अब कई छात्र सुरक्षित लौट रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की धमकी दी थी, लेकिन बाद में नरम रुख अपनाया। ईरान सरकार ने अमेरिका और इजरायल पर प्रदर्शनों को भड़काने का आरोप लगाया। इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण मौतों और हिंसा की स्वतंत्र पुष्टि मुश्किल हो गई है।
यह घटना ईरान में जारी अस्थिरता को दर्शाती है, जहां प्रदर्शन अब पूरे 31 प्रांतों में फैल चुके हैं। भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी से राहत मिली है, लेकिन स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। MEA लगातार निगरानी कर रहा है। आगे की अपडेट्स के लिए बने रहें!
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