ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi
अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को खत्म करने की कोशिशों के बीच तनाव कम होने के बजाय बातचीत का रास्ता और जटिल हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत आगे बढ़ाने की बात कही गई थी। इसके बावजूद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि तेहरान कूटनीति के लिए तैयार है।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि वह और राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान न्यूयॉर्क युद्ध को आगे बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि शांति की कोशिश के लिए आए हैं। NBC के कार्यक्रम ‘Meet the Press’ में अराघची ने कहा कि ईरान किसी भी नए सैन्य हमले का सामना करने के लिए तैयार है, लेकिन इसके साथ ही वास्तविक कूटनीति का रास्ता भी खुला रखना चाहता है।
अराघची ने यह भी कहा कि अगर युद्ध दोबारा शुरू होता है तो ईरान उसका सामना करने के लिए तैयार है। उनके मुताबिक, अंतिम फैसला अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को करना है।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे अहम मुद्दों में से एक बन गया है। ईरान ने प्रस्ताव दिया था कि कुछ शर्तें पूरी होने पर जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकता है और बातचीत के जरिए संघर्ष खत्म करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। ईरान के प्रस्ताव में अमेरिकी सैन्य दबाव कम करने और बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाने जैसी शर्तें भी शामिल थीं।
वहीं ट्रंप ने 26 सितंबर को ईरान के इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि तेहरान दबाव में आकर यह समझौता करना चाहता है। इसके बाद भी दोनों पक्षों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत की संभावना बनी हुई है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी वार्ताकार इस सप्ताह ईरान के साथ बातचीत कर सकते हैं।
ईरान का कहना है कि होर्मुज को खोलने और व्यापक युद्धविराम की दिशा में आगे बढ़ने के लिए उसकी कुछ शर्तों को स्वीकार करना होगा। दूसरी ओर, अमेरिका ईरान के प्रस्ताव की शर्तों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं दिख रहा है।
कतर समेत कुछ मध्यस्थ दोनों देशों के बीच संदेशों के आदान-प्रदान में भूमिका निभा रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रस्ताव को लेकर पर्दे के पीछे कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां तनाव बढ़ने का असर तेल की आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। युद्ध के दौरान जलडमरूमध्य में यातायात प्रभावित होने से पहले ही ऊर्जा बाजार पर दबाव देखा गया है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका और ईरान अपनी शर्तों में कुछ नरमी लाकर दोबारा बातचीत की मेज पर लौटते हैं या होर्मुज को लेकर गतिरोध और लंबा खिंचता है।
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