तेहरान/लंदन। ईरान लगातार पलटवार कर रहा है और रुकने का नाम नहीं ले रहा है। दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप हर दिन अपने बयानों को बदल रहे हैं, लेकिन उनके बयान लगातार ईरान को तबाह और बर्बाद करने की चेतावनी देते नजर आ रहे हैं।
इतना ही नहीं, ट्रंप ने ईरान को पत्थर युग में भेजने की बात तक कह डाली है। उनके मुताबिक, अगर ईरान ने उनके साथ समझौता नहीं किया, तो इस बार उसे ऐसा दर्द दिया जाएगा जिसे वह सदियों तक याद रखेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के पास समय बहुत कम है, और यदि वह समझौता नहीं करता है, तो उसे पत्थर युग में धकेल दिया जाएगा यानी ऐसी बमबारी की जाएगी जिससे ईरान पूरी तरह तबाह हो सकता है।
हालांकि, ईरान की सेना भी अमेरिका को करारा जवाब दे रही है। उसका कहना है कि वह अमेरिका के सामने सरेंडर नहीं करेगी और जब तक इजरायल और अमेरिका को सबक नहीं सिखा देती, तब तक उसके हमले जारी रहेंगे। इसी बीच, ईरान ने एक और बड़ा दावा किया है। उसके इस ताजा दावे से ट्रंप की चिंता बढ़ सकती है। ईरान की सेना ने सेंटर ईरान के मरकजी प्रांत में एक अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान को मार गिराया है।
मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भारी तनाव के बीच ईरान के ‘खातिम अल-अंबिया’ मुख्यालय ने एक सनसनीखेज दावा किया है। अल-जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने हाल ही में गिराए गए एक संदिग्ध विमान के मलबे की जांच पूरी कर ली है। ईरान का दावा है कि विमान के अवशेषों पर ब्रिटेन स्थित लेकनहीथ एयर बेस (Lakenheath Air Base) के स्पष्ट निशान मिले हैं।
बता दें कि लेकनहीथ एयर बेस ब्रिटेन में अमेरिकी वायुसेना (USAF) का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक सैन्य अड्डा है। इस खुलासे के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खलबली मच गई है, हालांकि अभी तक विमान के पायलट या उसके विशिष्ट मिशन के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
यह पहली बार नहीं है जब ईरान ने अमेरिकी लड़ाकू विमान को निशाना बनाने का दावा किया है। इससे पहले 19 मार्च को भी ईरान ने एक वीडियो जारी कर अमेरिकी F-35A फाइटर जेट को मार गिराने की बात कही थी।
अमेरिकी रिपोर्ट: कुछ रक्षा रिपोर्टों के अनुसार, विमान को गंभीर नुकसान जरूर पहुंचा था और पायलट को मामूली चोटें आईं, लेकिन विमान क्रैश नहीं हुआ। पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए मिडिल ईस्ट में स्थित एक अमेरिकी बेस पर विमान की ‘इमरजेंसी लैंडिंग’ कराने में सफलता हासिल की थी।
ईरान द्वारा मलबे में ब्रिटिश बेस के निशान पाए जाने का दावा सीधा इशारा करता है कि अमेरिकी विमानों को संचालित करने के लिए सहयोगी देशों की जमीन का इस्तेमाल हो रहा है।
लेकनहीथ बेस से उड़ान भरने वाले विमान अक्सर नाटो (NATO) और अमेरिकी ऑपरेशन्स का हिस्सा होते हैं। यदि ईरान के दावे सच साबित होते हैं, तो यह कूटनीतिक स्तर पर ब्रिटेन और अमेरिका के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
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