इजराइल और अमेरिका के संयुक्त हमले के बाद ईरान को लेकर बढ़े तनाव का असर अब सीधे भारतीय बाजारों पर दिखने लगा है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता से निवेशकों में घबराहट बढ़ी और शुक्रवार (27 फरवरी) को बाजार बुरी तरह टूट गया। सेंसेक्स 961 अंक गिरकर 81,287 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 318 अंक लुढ़ककर 25,179 के स्तर पर आ गया। अब सोमवार को बाजार के गैप-डाउन ओपनिंग के साथ खुलने की आशंका जताई जा रही है।
तेल की कीमतों में उछाल, भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता
इस पूरे तनाव का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड करीब 2.8% उछलकर 72.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, वहीं WTI क्रूड भी 67.02 डॉलर के आसपास बंद हुआ। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर हालात और बिगड़े और ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर सख्त कदम उठाए, तो तेल 90 से 110 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है।
भारत अपनी करीब 85% तेल जरूरतें आयात करता है। ऐसे में तेल के हर 10 डॉलर महंगे होने से देश के आयात बिल पर लगभग 90 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ता है, RBI के लिए ब्याज दरों में कटौती मुश्किल हो सकती है और रुपये पर भी दबाव बढ़ सकता है।
बाजार और निवेशकों पर क्या असर?
बाजार जानकारों के मुताबिक, अगर कच्चा तेल 80 डॉलर के पार जाता है तो भारतीय शेयर बाजार में 4–6% तक का करेक्शन देखने को मिल सकता है। खासकर ऑयल मार्केटिंग कंपनियां और एविएशन सेक्टर दबाव में रहेंगे क्योंकि उनकी लागत बढ़ेगी। वहीं डिफेंस सेक्टर को ऑर्डर बढ़ने की उम्मीद से सपोर्ट मिल सकता है और सोना-चांदी जैसे सेफ हेवन एसेट्स में मांग बनी रह सकती है।
FII की बिकवाली भी चिंता बढ़ा रही है। पिछले कुछ दिनों में विदेशी निवेशकों ने बड़ी रकम निकाली है, जिससे बाजार की कमजोरी और गहरी हो सकती है। रुपये की बात करें तो USD/INR के 91.20–91.50 के दायरे में खुलने की संभावना जताई जा रही है, और तेल महंगा होने से इसमें और कमजोरी आ सकती है।
कुल मिलाकर, शॉर्ट टर्म में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और नई पोजीशन लेने से बचने की सलाह दी जा रही है। अगर हालात 7–10 दिनों में संभल जाते हैं तो बाजार में तेज रिकवरी भी दिख सकती है, लेकिन अगर ईरान-इजराइल तनाव लंबा खिंचता है या होर्मुज स्ट्रेट प्रभावित होती है, तो दबाव और बढ़ सकता है।