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ईरान संकट पर भारत की सियासत: Priyanka Gandhi ने पश्चिम पर साधा निशाना, जनता के साहस की सराहना

नई दिल्ली। Iran और United States के बीच बढ़े तनाव और फिर अचानक हुए सीजफायर के बीच भारत की राजनीति भी सक्रिय हो गई है। कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिमी देशों की भाषा और रुख पर सवाल उठाए हैं, जबकि ईरानी जनता के साहस की खुलकर सराहना की है।

‘मानव श्रृंखला’ बनी प्रतिरोध की पहचान

हालिया तनाव के दौरान जब Donald Trump ने ईरान के अहम ढांचों पर हमले की चेतावनी दी, तो इसका असर सीधे आम नागरिकों पर पड़ा। ईरान के कई शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए और पावर प्लांट, पुलों और अन्य अहम संसाधनों के चारों ओर मानव श्रृंखला बनाकर खड़े हो गए। यह दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और इसे नागरिक एकजुटता का प्रतीक माना गया।

प्रियंका गांधी का पश्चिम पर हमला

Priyanka Gandhi ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब पश्चिमी ताकतें ‘एक सभ्यता के अंत’ जैसी भाषा का इस्तेमाल कर रही थीं, तब ईरान के लोग अपने संसाधनों की रक्षा के लिए एकजुट होकर खड़े थे।

उन्होंने कहा कि दुनिया अब समझ रही है कि तथाकथित नैतिकता का असली चेहरा क्या है। उनके मुताबिक, यह समय है जब वैश्विक समुदाय को सच्चाई पहचानकर न्याय के पक्ष में खड़ा होना चाहिए।

‘नफरत नहीं, साहस जीतता है’

अपने संदेश में उन्होंने जोर देकर कहा कि गुस्सा, हिंसा और अन्याय कभी स्थायी जीत हासिल नहीं कर सकते। उनका कहना था कि इतिहास गवाह है—आखिरकार साहस और एकजुटता ही जीतती है।

Rahul Gandhi की भी कड़ी प्रतिक्रिया

लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि युद्ध भले ही एक सच्चाई हो, लेकिन किसी भी सभ्यता के अंत की कल्पना करना या ऐसी भाषा का इस्तेमाल करना पूरी तरह अस्वीकार्य है।

उन्होंने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना को भी खतरनाक बताते हुए इसे किसी भी स्थिति में गलत ठहराया। आखिरी वक्त पर सीजफायर, टला बड़ा संकट

तनाव के चरम पर पहुंचने के बाद Donald Trump ने ईरान के साथ दो हफ्तों के लिए सीजफायर पर सहमति जताई। यह फैसला उस तय समय सीमा से ठीक पहले आया, जब संभावित हमले की आशंका जताई जा रही थी।

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस फैसले ने न सिर्फ ईरान बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट को बड़े टकराव से फिलहाल राहत दी है।

क्या कहती है यह पूरी घटना?

यह घटनाक्रम सिर्फ दो देशों के बीच तनाव की कहानी नहीं है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति, नैरेटिव और आम जनता की भूमिका को भी उजागर करता है।

एक तरफ महाशक्तियों की रणनीति है, तो दूसरी तरफ सड़कों पर उतरे आम नागरिक—जो अपने स्तर पर हालात को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।

news desk

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