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घर पर गणपति विसर्जन करने जा रहे हैं? एक छोटी सी गलती पड़ सकती है भारी, जान लें सही विधि और जरूरी नियम

नई दिल्ली: गणपति उत्सव के समापन पर 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन किया जाएगा। सार्वजनिक स्थानों और जलाशयों में विसर्जन के लिए प्रशासन की ओर से व्यापक इंतजाम किए जाते हैं, लेकिन पर्यावरण या अन्य कारणों से कई लोग घर पर ही गणपति बप्पा का विसर्जन करते हैं। ऐसे में केवल प्रतिमा का विसर्जन करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि विसर्जन से पहले और बाद की प्रक्रिया का भी विशेष ध्यान रखने की धार्मिक परंपरा है।

घर पर विसर्जन करने वालों के लिए जरूरी है कि पूरी प्रक्रिया श्रद्धा और सम्मान के साथ पूरी की जाए। इसके लिए पहले से साफ पानी, उचित पात्र और पूजा की सामग्री तैयार रखनी चाहिए। साथ ही विसर्जन के बाद बचे जल और पूजा सामग्री का भी सही तरीके से निपटारा करना चाहिए।

विसर्जन से पहले दोबारा करें गणपति की पूजा

घर पर गणपति विसर्जन से पहले सुबह की नियमित पूजा के बाद एक बार फिर गणपति बप्पा की आरती करने की परंपरा है। इसके बाद भगवान को लड्डू या मोदक का भोग लगाएं और फूल अर्पित करें।

परिवार के सभी सदस्य मिलकर गणपति बप्पा मोरया का जयकारा लगाएं और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। पूजा या अनुष्ठान के दौरान जाने-अनजाने में हुई किसी भी गलती के लिए भगवान से क्षमा मांगने की भी परंपरा है।

विसर्जन के लिए साफ टब या बाल्टी रखें

घर पर विसर्जन करने के लिए पहले से एक साफ टब या बाल्टी में स्वच्छ पानी भर लें। इसमें थोड़े अक्षत और फूल डाल सकते हैं। जिस पात्र में प्रतिमा का विसर्जन किया जा रहा है, वह साफ और ठीक स्थिति में होना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार टूटी या बदरंग बाल्टी अथवा टब का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

इसके बाद टब या बाल्टी के पास लकड़ी का पाटा रखें और उस पर गंगाजल का छिड़काव कर उसे शुद्ध करें। पाटे पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर ताजे फूल रखें और थोड़े अक्षत अर्पित करें।

प्रतिमा को सम्मान के साथ विसर्जन स्थल तक लाएं

गणपति की प्रतिमा को स्थापना स्थल से सम्मानपूर्वक उठाकर तैयार किए गए पाटे पर विराजमान करें। विसर्जन से पहले एक बार फिर भगवान से क्षमा प्रार्थना करें और परिवार के साथ पूजा करें।

इसके बाद गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ के जयकारों के साथ प्रतिमा को आदरपूर्वक उठाएं और विसर्जन के लिए तैयार पानी में ले जाएं।

प्रतिमा को धीरे-धीरे करें विसर्जित

धार्मिक विधि के अनुसार प्रतिमा को पहले तीन बार पानी में आंशिक रूप से डुबोया जाता है। इसके बाद उसे धीरे-धीरे पूरी तरह पानी में विसर्जित करें। प्रतिमा को तब तक पानी में रहने दें, जब तक वह पूरी तरह घुल न जाए।

विसर्जन की पूरी प्रक्रिया के दौरान जल्दबाजी करने के बजाय प्रतिमा को सम्मानपूर्वक और सावधानी से पानी में विसर्जित करना चाहिए।

विसर्जन के बाद जल को इस तरह करें इस्तेमाल

प्रतिमा के पूरी तरह विसर्जित होने के बाद बचे हुए जल को घर के पौधों या गमलों में डालने की परंपरा बताई गई है। ध्यान रखें कि यह जल किसी व्यक्ति के पैरों के नीचे न आए और न ही किसी अपवित्र स्थान पर जाए।

पूजा में इस्तेमाल किए गए बचे हुए फूलों को भी घर के पौधों या गमलों में डाल सकते हैं। इस तरह विसर्जन के बाद पूजा सामग्री का भी सम्मानपूर्वक निपटारा किया जा सकता है।

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