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‘अगर मुझ पर हमला हुआ तो ईरान पर बरसेंगी 1000 मिसाइलें’… ट्रंप की सबसे बड़ी चेतावनी के पीछे क्या है पूरी कहानी?

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान सरकार की ओर से उनकी हत्या की जाती है या हत्या का कोई प्रयास होता है तो अमेरिका ईरान पर एक हजार मिसाइलें दाग देगा। उन्होंने दावा किया कि मिसाइलें पहले से तैयार हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंचा हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना ईरान के किसी भी हिस्से पर कार्रवाई करने में सक्षम है और यह तैयारी अगले एक वर्ष तक जारी रहेगी।

ट्रंप और ईरान के बीच दुश्मनी इतनी गहरी क्यों हुई?

डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच टकराव कोई नया नहीं है। दोनों देशों के संबंध वर्षों से बेहद तनावपूर्ण रहे हैं और कई बड़े घटनाक्रमों ने इस दुश्मनी को और गहरा किया है।

पहला बड़ा कारण ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई की मौत से जुड़ा है। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के दौरान 28 फरवरी 2026 को तेहरान समेत कई शहरों पर अमेरिका और इजरायल की ओर से हवाई हमले किए गए। इन हमलों में खामेनेई सहित ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारियों के मारे जाने का दावा किया गया। यह सैन्य कार्रवाई ट्रंप के आदेश पर हुई बताई गई, जिसके बाद ईरान में उनके खिलाफ गुस्सा और बढ़ गया।

दूसरा बड़ा कारण जनवरी 2020 में इराक के बगदाद एयरपोर्ट के पास हुआ ड्रोन हमला है। ट्रंप के आदेश पर किए गए इस हमले में ईरान की कुद्स फोर्स के प्रमुख जनरल कासिम सुलेमानी की मौत हुई थी। हाल ही में खामेनेई की अंतिम यात्रा के दौरान भी सुलेमानी का नाम लेते हुए ट्रंप के खिलाफ बदला लेने के नारे लगाए गए।

तीसरा कारण ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका की वापसी है। अपने पहले कार्यकाल में ट्रंप ने बराक ओबामा के समय हुए परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर निकाल लिया था। इसके साथ ही उन्होंने अधिकतम दबाव की नीति के तहत ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए, जिससे ईरानी अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा।

ईरान को ट्रंप की सीधी चेतावनी

ट्रंप ने कहा कि ईरान पर एक हजार मिसाइलें पहले से निशाना साधे तैयार हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि ईरान ने उनकी हत्या की धमकी को अमल में बदलने की कोशिश की तो तुरंत हजारों अतिरिक्त मिसाइलें भी दागी जाएंगी। ट्रंप के मुताबिक इस संबंध में पहले ही आदेश दिए जा चुके हैं और अमेरिकी सेना ईरान के हर इलाके में कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

तुर्किये दौरे के बाद विमान बदलने पर भी उठे सवाल

7 और 8 जुलाई को तुर्किये में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप की सुरक्षा भी चर्चा का विषय बनी रही। अमेरिका से तुर्किये पहुंचने के लिए उन्होंने नए बोइंग 747-8 विमान का इस्तेमाल किया, जिसे कतर की ओर से उपहार में दिया गया था और जिसकी सुरक्षा व्यवस्था विशेष रूप से मजबूत की गई थी।

हालांकि, सम्मेलन समाप्त होने के बाद अमेरिका लौटते समय ट्रंप ने नया विमान छोड़कर पुराने बोइंग वीसी-25ए एयर फोर्स वन से यात्रा की। वहीं नया विमान ब्रिटेन स्थित मिल्डेनहॉल एयरबेस भेज दिया गया। ट्रंप ने विमान बदलने को सीधे तौर पर किसी सुरक्षा खतरे से नहीं जोड़ा, लेकिन इतना जरूर कहा कि वह ईरान के निशाने पर सबसे ऊपर हैं।

क्या सुरक्षा कारणों से लिया गया फैसला?

ट्रंप का विमान बदलने का फैसला ऐसे समय सामने आया, जब अमेरिका ने 7 और 8 जुलाई को ईरान के 90 से अधिक सैन्य ठिकानों पर जवाबी हवाई हमले किए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया। तुर्किये की भौगोलिक स्थिति और ईरान से उसकी निकटता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने अतिरिक्त सतर्कता बरती होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

व्हाइट हाउस ने क्या कहा?

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता स्टीवन चेउंग ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए बेहद उच्च स्तर के सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू रहते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका के कई विरोधी ट्रंप को निशाना बनाना चाहते हैं, इसलिए सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर ऐसी रणनीतियां भी अपनाती हैं जिनसे संभावित दुश्मनों को भ्रमित किया जा सके।

ईरान की सैन्य क्षमता कितनी है?

ईरान के पास कई लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन मौजूद हैं। खुर्मशहर-4 खैबर मिसाइल की मारक क्षमता 2,000 से 3,000 किलोमीटर तक बताई जाती है। सज्जिल बैलिस्टिक मिसाइल करीब 2,000 किलोमीटर तक हमला कर सकती है। शाहेद-136 और अराश-2 जैसे ड्रोन भी लगभग 2,000 से 2,500 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम बताए जाते हैं। वहीं शाहेद-149 गाजा कॉम्बैट ड्रोन की रेंज भी 2,000 किलोमीटर से अधिक मानी जाती है।

क्या ईरान अमेरिका तक हमला कर सकता है?

मौजूदा उपलब्ध जानकारी के अनुसार ईरान के पास ऐसी मिसाइल या ड्रोन क्षमता नहीं है, जो करीब 7,000 किलोमीटर दूर स्थित अमेरिका तक सीधे हमला कर सके। हालांकि ट्रंप को लेकर ईरान की ओर से दी गई धमकियों के बीच अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। ऐसे माहौल में ट्रंप की ओर से एक हजार मिसाइलों की चेतावनी ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।

 

vineet verma

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