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IAS नागार्जुन बी. गौड़ा पर रिश्वत का आरोप! खनन कंपनी को करोड़ों का फायदा पहुंचाने का दावा — RTI कार्यकर्ता का चौंकाने वाला खुलासा

सोशल मीडिया पर अपनी स्टाइल और पर्सनैलिटी के लिए सुर्खियों में रहने वाले IAS अधिकारी डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा अब एक बड़े विवाद में घिरते नजर आ रहे हैं. उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं, जिसके बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है.

क्या है मामला ?

दरअसल, वर्ष 2023 में हरदा के तत्कालीन अपर कलेक्टर प्रवीण फूलपगारे ने सड़क निर्माण कंपनी पाथ इंडिया पर बिना अनुमति 3.11 लाख घन मीटर मुरम मिट्टी की खुदाई करने के आरोप में ₹51.67 करोड़ का जुर्माना लगाया था. इस राशि में ₹25.83 करोड़ अवैध खनन और उतनी ही राशि पर्यावरण क्षति के तौर पर शामिल थी.
बाद में, फूलपगारे के तबादले के बाद IAS डॉ. नागार्जुन गौड़ा ने बतौर नए अपर कलेक्टर इस प्रकरण की सुनवाई की. कंपनी ने दलील दी कि उसने खुदाई स्वीकृत क्षेत्र में की थी. जांच के बाद गौड़ा ने माना कि केवल 2,688 घन मीटर मुरम का ही अवैध खनन हुआ है और जुर्माना घटाकर मात्र ₹4,032 कर दिया गया.
आरोप है कि इस तरह उन्होंने कंपनी को करोड़ों रुपये का फायदा पहुंचाया. डॉ. गौड़ा फिलहाल खंडवा जिला पंचायत के सीईओ पद पर तैनात हैं.


RTI से हुआ खुलासा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक RTI कार्यकर्ता आनंद जाट ने खुलासा किया है कि डॉ. गौड़ा ने कंपनी को राहत देने के बदले कथित रूप से ₹10 करोड़ की रिश्वत ली थी. उनका कहना है कि जिस कंपनी पर करोड़ों का जुर्माना लगाया गया था, उसे अधिकारी ने “सबूतों की कमी” का हवाला देकर बचा लिया.


अधिकारी का पक्ष

हालांकि IAS डॉ. नागार्जुन गौड़ा ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका निर्णय पूरी तरह “कानूनी प्रक्रिया और दस्तावेजों” के आधार पर लिया गया था. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में किसी भी तरह की अनियमितता नहीं की है और जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी.

NGT ने लगाया करोड़ो का जुर्माना
जानकारी के मुताबिक NGT ने पाथ इंडिया कंपनी पर ₹3.5 करोड़ का जुर्माना लगाया था और इसमें शामिल अधिकारियों की भूमिका की ईडी से जांच कराने के निर्देश दिए थे.
कंपनी ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जहां मामला अभी विचाराधीन है.


सोशल मीडिया पर बहस तेज
जैसे ही यह मामला सार्वजनिक हुआ, सोशल मीडिया पर IAS डॉ. गौड़ा को लेकर बहस छिड़ गई है. कई यूजर्स ने उन्हें “भ्रष्ट सिस्टम का हिस्सा” बताते हुए आलोचना की, जबकि कुछ ने कहा कि “डॉ. गौड़ा एक ईमानदार और काबिल अधिकारी हैं, जिन्हें साजिशन फंसाया जा रहा है.”
इस मामले के सामने आने के बाद मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में भी हलचल मच गई है.

news desk

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