अमेरिका और ईरान के बीच चल रही सीजफायर और शांति वार्ता अचानक बारूद के ढेर पर आकर टिक गई है। शुक्रवार को अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के भीतर घुसकर उसकी मिसाइल, ड्रोन और तटीय रडार साइटों को पूरी तरह तबाह कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस एयरस्ट्राइक की पुष्टि करते हुए इसे ईरान द्वारा ‘सीजफायर का खुला उल्लंघन’ करार दिया है।
यह सैन्य कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में संयुक्त राष्ट्र (UN) समर्थित एक कमर्शियल कार्गो शिप पर हुए संदिग्ध ईरानी ड्रोन हमले के जवाब में की गई है। इस बड़े घटनाक्रम के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की सप्लाई चेन पर गंभीर संकट मंडराने लगा है।
व्हाइट हाउस में जवाबी हमले से ठीक पहले एक बेहद अजीब और तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा:
“मुझे यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई कि उन्होंने (ईरान ने) हमला किया, असल में उन्होंने एक नहीं बल्कि चार हमले किए हैं। वे (ईरान के नेता) थोड़े अलग मिजाज के हैं।”
जब पत्रकारों ने सवाल किया कि एक तरफ तेहरान के साथ शांति वार्ता की बातें हो रही हैं, तो दूसरी तरफ ये हमले क्यों? इस सवाल पर ट्रंप भड़क गए, उन्होंने अचानक सवाल-जवाब का सिलसिला बीच में ही रोक दिया और सभी पत्रकारों को तत्काल ओवल ऑफिस से बाहर जाने का आदेश दे दिया। इसके कुछ ही देर बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान पर भारी बमबारी शुरू कर दी।
यह हमला तब हुआ जब इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) होर्मुज स्ट्रेट में फंसे सैकड़ों जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए ओमान के तट के पास से एक वैकल्पिक सुरक्षित रास्ता (UN-Backed Route) तैयार कर रहा था।
मरीन डेटा कंपनी ‘विंडवर्ड’ के मुताबिक, बुधवार को रिकॉर्ड 78 जहाज इस रास्ते से गुजरे थे और कमर्शियल भरोसा बहाल हो रहा था, लेकिन इस ताजा हमले ने वैश्विक व्यापार की कमर तोड़ दी है।
‘लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान इस बात पर अड़ा है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाज केवल तेहरान द्वारा तय किए गए रास्तों का ही इस्तेमाल करें। ईरान के इसी आक्रामक रुख के कारण ओमान के पास संयुक्त राष्ट्र समर्थित सुरक्षित रूट से गुजरने की कोशिश कर रहे कम से कम दो विशाल तेल टैंकरों को अपनी दिशा बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
यह तनाव एक ऐसे नाजुक मोड़ पर आया है जब अमेरिका और ईरान युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए 60 दिनों के अंतरिम समझौते पर बातचीत कर रहे थे। इस समझौते के तहत:
बड़ा नुकसान: होर्मुज के बजाय ओमान का वैकल्पिक रास्ता खुलने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर से दबाव कम हो रहा था और ईरान के हाथ से ब्लैकमेलिंग का सबसे बड़ा पत्ता छिन रहा था। विश्लेषकों का मानना है कि अपनी इसी बारगेनिंग पावर (Bargaining Power) को बनाए रखने के लिए ईरान ने यह आत्मघाती कदम उठाया है, जिसने अब एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की नींव रख दी है।
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