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अहमदाबाद एयरक्रैश में जांच समिति की निष्पक्षता पर सवाल, सुप्रीम कोर्ट ने कहा – “केवल पायलट पर दोष मढ़ना दुर्भाग्यपूर्ण”

सुप्रीम कोर्ट ने आज सोमवार को अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे की जांच में निष्पक्षता के मामले में बड़ा कदम उठाया है. सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन की ओर से दायर इस याचिका में विमान हादसे पर गठित जांच समिति की निष्पक्षता पर कई गंभीर सवाल उठाए गए थे, जिस पर सुनवाई के दौरान अब कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है.
यह हादसा उस वक्त हुआ था, जब 12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन जा रहा एयर इंडिया का बोइंग विमान टेकऑफ के कुछ ही सेकेण्ड्स बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. इस विमान-हादसे में लगभग 260 लोगों की मौत हो गई थी, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था. हालांकि हादसे के 100 से ज्यादा दिन बीत जाने के बावजूद अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया कि दुर्घटना कैसे हुई था और जिम्मेदार कौन हैं.

याचिका में जांच कमेटी की निष्पक्षता पर उठे सवाल

जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच के सामने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने दलील रखी कि जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय टीम में तीन सदस्य DGCA के ही अधिकारी हैं, ऐसे में हितों का टकराव उत्पन्न होता है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब इस मामले में खुद DGCA अधिकारी की भूमिका जांच के घेरे में है तब उसके अधिकारी जांच में शामिल कैसे हो सकते हैं ?

सिर्फ पायलट पर दोष मढ़ने की हुई कोशिश-याचिकाकर्ता

भूषण ने यह भी कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट के केवल कुछ हिस्सों को ही प्रकाशित किया गया है , जिसमें पायलट पर दोष मढ़ने की कोशिश हुई .
उन्होंने विमानन विश्लेषकों और एयरलाइन मैटर्स जैसे पॉडकास्ट का हवाला देते हुए कहा कि मामले के विश्लेषकों ने जिम्मेदारी से घटना की जांच करते हुए निष्कर्ष निकाला है कि दुर्घटना पायलट की लापरवाही से नहीं, बल्कि एक बिजली आपूर्ति में खराबी के कारण हुई थी, जिससे विमान के दोनों इंजन बंद हो गए थे.

फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग

भूषण ने प्रारंभिक रिपोर्ट से अलग-अलग पंक्तियों के लीक होने की आलोचना करते हुए कहा कि यह मामले की व्यापक तस्वीर को विकृत करती है. इसके साथ ही उन्होंने निष्पक्ष जांच टीम और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर की जानकारी सार्वजनिक करने की भी मांग की है.

केवल पायलट की गलती प ध्यान देना दुर्भाग्यपूर्ण- न्यायालय

न्यायालय ने याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट में केवल पायलट की गलती पर चर्चा करना दुर्भाग्यपूर्ण था. हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग उचित नहीं मानी. इसके साथ कोर्ट ने उम्मीद जताई कि अंतिम जांच रिपोर्ट सभी सवालों का संतोषजनक जवाब देगी.

कोर्ट ने केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस

फिलहाल इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका में जताई गई चिंता से सहमति जताते हुए हादसे की स्वतंत्र जांच और निष्पक्षता पर केंद्र सरकार, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) को जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया है.
साथ ही उसने यह भी कहा कि कोर्ट यह नोटिस इस सीमित सवाल पर है कि क्या हादसे की स्वतंत्र, निष्पक्ष और तेज जांच हो रही है.

news desk

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